Sathyaraj: ‘कहते हैं जहां में सबको सबकुछ नहीं मिला… किसी को जमी नहीं मिलती तो किसी को मुकम्मल आसमां नहीं मिलता’. ‘बाहुबली’ के कट्टप्पा यानी सत्यराज की निजी जिंदगी दर्द से भरी है. उनकी पत्नी महेश्वरी पिछले चार साल से कोमा में हैं. साइलेंट ब्रेन हेमरेज के बाद परिवार की दुनिया बदल गई. इस मुश्किल दौर में सत्यराज बच्चों के लिए सिंगल पेरेंट बने हुए हैं. मां की कमी महसूस न हो, इसलिए वह अपना दर्द और आंसू अक्सर बच्चों से छिपा लेते हैं.
कट्टप्पा यानी सत्यराज सालों से इंडस्ट्री में राज कर रहे हैं.
करीब आठ साल पहले उनकी पत्नी महेश्वरी ने 50 की उम्र में ऐसा फैसला लिया, जिसने सभी का ध्यान खींचा. जब पति और दोनों बच्चे अपने-अपने करियर में स्थापित हो चुके थे, तब महेश्वरी ने फिल्म प्रोड्यूसर बनने का निश्चय किया. वह शादी से पहले तमिलनाडु के उदुमलपेट स्थित विशालाक्षी कॉलेज से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक रह चुकी थीं.
जब समाज समझता था विलेन, तब महेश्वरी ने थामा हाथ
सत्यराज और महेश्वरी की शादी ऐसे समय में हुई थी, जब सत्यराज फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभाते थे और अभिनेता से विवाह को समाज में आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता था. रिश्तेदारों की नाराजगी के बावजूद महेश्वरी की मां इस रिश्ते को लेकर आश्वस्त थीं. शादी के बाद दंपती चेन्नई के एक छोटे से घर में रहने लगे. महेश्वरी ने कई बार कहा कि पति सत्यराज न सिर्फ एक अभिनेता, बल्कि एक जिम्मेदार पिता और जीवनसाथी के रूप में हमेशा उनके साथ खड़े रहे.
सत्यराज अपनी पत्नी महेश्वरी सत्यराज के साथ.
हर कदम पर दिया पत्नी का साथ
महेश्वरी ने बच्चों के साथ ड्राइविंग और तैराकी सीखी. जब उन्होंने तैराकी सीखने की इच्छा जताई तो सत्यराज का जवाब था ‘जो तुम्हें पसंद है, उसके लिए मेरी इजाजत की जरूरत नहीं.’ बाद में जब सत्यराज हीरो बने और को-स्टार्स को लेकर गॉसिप्स उड़ने लगी, तब भी महेश्वरी ने उन बातों को कभी महत्व नहीं दिया. उल्टा, अंबिका, खुशबू और भानुप्रिया जैसी हसीनाओं से उनकी दोस्ती रही. बच्चों के बड़े होने तक महेश्वरी ने पूरी तरह परिवार को प्राथमिकता दी. बाद में उन्होंने सिनेमा को कुछ लौटाने की इच्छा से अपनी सास के नाम पर ‘नादाम्बाल फिल्म फैक्टरी’की शुरुआत की, जिसमें सत्यराज हर कदम पर उनके साथ रहे.
2020-21 में टूटा दुखों का पहाड़
लेकिन 2020-21 में पहले परिवार पर दुखों का साया पड़ गया. एक्टर की बेटी बेटी दिव्या सत्यराज ने बताया कि एक साइलेंट ब्रेन हेमरेज के बाद महेश्वरी पिछले चार सालों से कोमा में हैं. अचानक बेहोश होकर गिरने के बाद उन्हें घर पर ही विशेष देखभाल दी जा रही है और भोजन पीईजी ट्यूब के जरिए दिया जाता है. कठिन हालात के बावजूद परिवार एक मेडिकल चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठा है, दिव्या कहती हैं कि जिस घर में मां हर चीज की धुरी थीं, आज वहीं पिता सत्यराज अपने दोनों बच्चों के लिए सिंगल पेरेंट बनकर मजबूती से खड़े हैं और हमसे अपने दुख को छिपाते हैं.
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शिखा पाण्डेय News18 Digital के साथ दिसंबर 2019 से जुड़ी हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. News18 Digital से पहले वह Zee News Digital, Samachar Plus, Virat Vaibhav जैसे प्रतिष्ठ…और पढ़ें
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