इस मामले में राजपाल यादव पर लगभग 2.5 करोड़ रुपये की बकाया राशि के लिए कार्रवाई चल रही थी, जो कई सालों से लंबित थी. अदालत ने उनका अंतिम अनुरोध खारिज कर दिया, जिसके बाद उन्होंने तिहाड़ में सरेंडर किया.
‘मेरे पास पैसे नहीं, दूसरा उपाय भी नहीं’
फिल्मीबीट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरेंडर से ठीक पहले एक्टर ने एक भावुक बयान भी दिया, जिसमें उन्होंने कहा, ‘सर, मेरे पास पैसे नहीं हैं… और कोई उपाय नहीं दिखता. जब उनसे इंडस्ट्री के किसी दोस्त की मदद लेने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘यहां हम सब अकेले हैं, कोई दोस्त नहीं. मुझे इस संकट से खुद ही निपटना होगा.’
क्या है मामला
आपको बता दें कि यह मामला 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई, जिसके बाद लोन चुकाने में असफल रहे. उनके और उनकी पत्नी द्वारा जारी कई चेक बाउंस हो गए, जिस पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत केस दर्ज हुआ. अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें और पत्नी को 6 महीने की सजा सुनाई. सेशन कोर्ट ने 2019 में इसे बरकरार रखा. हाई कोर्ट में अपील के दौरान सजा पर स्टे मिला था, लेकिन सेटलमेंट न होने पर स्टे हट गया. ब्याज व जुर्माने के चलते बकाया रकम लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इस दौरान यादव ने 2025 में 75 लाख रुपये समेत कुछ आंशिक भुगतान किए, लेकिन बड़ी रकम लंबित रही.
4 फरवरी को खारिज हुई अंतिम याचिका
4 फरवरी, 2026 को कोर्ट ने फंड जुटाने के लिए एक हफ्ते का और समय मांगने की उनकी अंतिम याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने साफ किया कि किसी के मशहूर हस्ती होने मात्र से लगातार रियायत नहीं दी जा सकती और एक्टर को बिना किसी देरी के सरेंडर करने का निर्देश दिया. अगले दिन, 5 फरवरी को राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल प्रशासन के सामने सरेंडर कर दिया.
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