सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में हुई तेलुगु एक्ट्रेस प्रत्यूषा की मौत के मामले में दोषी जी सिद्धार्थ रेड्डी की याचिका खारिज करते हुए उसे चार हफ्ते में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है. अदालत ने साफ कहा कि यह हत्या या दुष्कर्म नहीं, बल्कि जहर से हुई मौत (आत्महत्या) का मामला है. सिद्धार्थ और प्रत्यूषा ने परिवार की असहमति के बाद साथ में जहर पिया था, जिसमें प्रत्यूषा की जान चली गई. हाईकोर्ट द्वारा दी गई 2 साल की सजा को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक्ट्रेस की मां के लगाए गए साजिश के आरोपों को भी खारिज कर दिया.
22 साल पुराने केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश.
जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने सुनवाई के दौरान उन सभी दावों को गलत ठहराया जिनमें कहा गया था कि प्रत्यूषा का गला घोंटा गया था या उनके साथ दुष्कर्म हुआ था. कोर्ट ने साफ किया कि मेडिकल रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर यह साबित हो चुका है कि मौत की असली वजह जहर थी. बेंच ने साफ कहा कि आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म या हत्या का जुर्म नहीं बनता, इसलिए इन पुरानी थ्योरीज पर अब दोबारा गौर करने का कोई मतलब नहीं है. मामला पूरी तरह से आत्महत्या और उसे उकसाने के इर्द-गिर्द ही सिमटा रहा, जिससे साफ हो गया कि कानूनी तौर पर इसे हत्या नहीं माना जा सकता.
प्यार और वो दर्दनाक हादसा
यह पूरा मामला साल 2002 का है, जब प्रत्यूषा और सिद्धार्थ रेड्डी के बीच छह साल से लव अफेयर था. कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब सिद्धार्थ के घरवाले इस रिश्ते के खिलाफ हो गए. दुखी होकर दोनों ने साथ जान देने का फैसला किया और कोका-कोला में कीटनाशक मिलाकर पी लिया. हालांकि, जहर पीने के बाद दोनों घबरा गए और खुद ही गाड़ी चलाकर अस्पताल पहुंचे. बदकिस्मती से डॉक्टर प्रत्यूषा को नहीं बचा पाए, जबकि सिद्धार्थ की जान बच गई. इसी को लेकर निचली अदालत ने सिद्धार्थ को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया था, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने 2 साल की सजा में बदल दिया था और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उसी सजा को बरकरार रखा है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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