Mohammed Rafi Superhit Hindi Songs : लीजेंड प्लेबैक सिंगर मोहम्मद रफी ने बॉलीवुड को कई कालजयी गाने दिए हैं. उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1944 में पंजाबी फिल्म ‘गुल बलोच’ से की थी. हिंदी सिनेमा में उनकी पहली फिल्म ‘गांव की गोरी’ (1945) मानी जाती है. उन्होंने नौशाद के संगीत निर्देशन में ‘पहले आप’ (1944) में भी गाया था. 1940 से 1969 तक उन्होंने बॉलीवुड में राज किया. फिर आया साल 1969 जब पहली बार किशोर कुमार स्टार बनकर उभरे. राजेश खन्ना बॉलीवुड के सुपर स्टार बने. रफी साहब का समय गिरने लगा. पूरे 8 साल बाद एक फिल्म ऐसी भी आई जब रफी साहब ने एक बार फिर से अपना जलवा बिखेरा. इसी फिल्म का एक गाना हमेशा के लिए अमर हो गया. वो फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…….
बॉलीवुड की दुनिया भी अजीबो-गरीब है. बड़े से बड़े सितारों ने भी बुरा समय देखा है. मोहम्मद रफी भी इससे अछूते नहीं रहे. 1940 से 1970 तक राज करने वाले रफी साहब का बुरा दौर 1969 में शुरू हुआ. इसी साल राजेश खन्ना की फिल्म ‘आराधना’ आई थी. इस फिल्म से राजेश खन्ना जहां रातोंरात सुपर स्टार बन गए वहीं इस फिल्म के सुपरहिट गानों को आवाज देने वाले किशोर कुमार भी स्टार बन गए. किशोर कुमार आवाज में जादू था. एनर्जी-मस्ती-रोमांस और फील-गुड था. रफी साहब ने 1977 में पर्दे पर दो ब्लॉकबस्टर फिल्मों से जबर्दस्त वापसी की. ये फिल्में थीं : अमर अकबर एंथोनी और धरम-वीर. इस फिल्म का गाने आज भी उतने ही पॉप्युलर हैं.

अमर अकबर एंथोनी 27 मई 1977 में रिलीज हुई एक मसाला फिल्म थी जिसका डायरेक्शन-प्रोडक्शन मनमोहन देसाई ने किया था. स्टोरी आइडिया मनमोहन देसाई की पत्नी जीवन प्रभा और पुष्पा शर्मा का था. डायलॉग कादेर खान ने लिखे थे. स्क्रीनप्ले प्रयागराज शर्मा-केके शुक्ला ने लिखा था. मूवी में विनोद खन्ना, ऋषि कपूर, अमिताभ बच्चन, नीतू सिंह, परवीन बॉबी, शबाना आजमी, निरूपा रॉय, और प्राण लीड रोल में थे. फिल्म का प्लॉट तीन बिछुड़े भाइयों का था. मनमोहन देसाई ने इस फिल्म में भी ‘खोया-पाया’ का फॉर्मूला आजमाया था.

अमर अकबर एंथोनी का म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने कंपोज किया था. गीतकार आनंद बख्शी थे. बहुत लंबे समय बाद मोहम्मद रफी का जादू इस फिल्म के जरिये देखने को मिला था. उन्होंने फिल्म के 5 गानों में अपनी आवाज दी थी. चार गाने सोलो थे. फिल्म में ऋषि कपूर के लिए रफी साहब ने अपनी आवाज दी.
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रफी साहब ने ‘अमर अकबर एंथोनी’ फिल्म के लिए ‘तैयाबाली प्यार का दुश्मन’, ‘पर्दा है पर्दा’, ‘शिर्डी वाले साईंबाबा’, ‘ये सच है कोई कहानी नहीं’ और ‘हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या करें’ जैसे गाने गाए. इसमें से दो गाने ‘पर्दा है पर्दा’ और ‘शिर्डी वाले साईंबाबा’ को तो उन्होंने अमर कर दिया. ‘शिर्डी वाले साईंबाबा’ गाने को देशभर के साईं मंदिरों में रोजाना लाखों भक्त गुनगुनाते हैं. यह गाना अमर हो गया.

अमर अकबर एंथोनी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त हिट रही. फिल्म के दिल छू लेने वाले गाने, कैरेक्टर, वन लाइनर सबकुछ एंटरटेनिंग थे. मूवी ने 25वें फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट एक्टर, बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर और बेस्ट एडिंटिंग का अवॉर्ड जीता.

इसी साल मनमोहन देसाई की एक और फिल्म ‘धरम-वीर’ 6 सितंबर 1977 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म के गानों ने धूम मचा दी थी. मोहम्मद रफी की आवाज का जादू इन गानों में देखने को मिला था. ‘धरम-वीर’ फिल्म का म्यूजिक भी ‘लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल’ ने तैयार किया था. गीत आनंद बख्शी ने लिखे थे. फिल्म के तीन गानों में रफी साहब की आवाज थी और तीनों ही गाने सुपरहिट साबित हुए. ये गाने थे : ओ मेरी महबूबा, सात अजूबे इस दुनिया में और मैं गलियों का राजा तू महलों की रानी.

मोहम्मद रफी बहुमुखी प्रतिभा के शख्स थे. उन्होंने क्लासिकल, भजन, कव्वाली, गजल, दर्द भरे गाने गाए. क्लासिकल ट्रेनिंग वाले सिंगर थे इसलिए सुर की पकड़ बहुत मजबूत थी. उन्होंने नौशाद, शंकर-जयकिशन, एसडी. बर्मन, ओपी. नैयर सबके साथ काम किया. उन्हें 6 बार बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला. पर्सनल लाइफ में वो बेहद विनम्र-शांत स्वभाव के थे.

रफी साहब ने अपना अंतिम गाना हब्बा खातून फिल्म के लिए 30 जुलाई 1980 को रिकॉर्ड किया. अगले ही दिन दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. गाने के बोल थे : जिस रात के ख्वाब आए, वो रात आई. गाने को पूरा करने के बाद उन्होंने संगीतकार नौशाद को गले लगाया और रो पड़े थे. उन्होंने कहा था, ‘नौशाद साहब, आज एक मुद्दत बाद अच्छा गीत आया है. आज बहुत सुकून मिला. अब जी चाहता है कि इस भरी पूरी दुनिया को छोड़कर चला जाऊं’.
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