‘पाकीजा’ बॉलीवुड की एक लैंडमार्क फिल्म है जिसे बनने में 16 साल लगे. कमाल अमरोही और मीना कुमारी स्टारर इस फिल्म का प्रोडक्शन 1956 में शुरू हुआ था, लेकिन अंदरूनी झगड़ों और टेक्निकल दिक्कतों की वजह से इसे पांच बार रोक दिया गया. जब यह 1972 में रिलीज हुई, तो इसने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया. मीना कुमारी की मौत के बाद, दर्शक इस फिल्म को देखने के लिए उमड़ पड़े, जिससे यह बॉलीवुड की सबसे बड़ी क्लासिक फिल्मों में से एक बन गई. जानें इस फिल्म को बनाने के पीछे के संघर्ष के बारे में, जिसने इसे अमर बना दिया.
नई दिल्ली. दुआ की तरह बनी फिल्म ‘पाकीजा’ बॉलीवुड में सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि इसे ‘सिनेमा का ताजमहल’ कहा जाता है, लेकिन इस ताजमहल को बनने में 16 लंबे साल लग गए. यह फिल्म बॉलीवुड के उस जिद्दी जुनून की मिसाल है, जिसे दुनिया ‘अनलकी’ और ‘आउटडेटेड’ मानती थी. जब डायरेक्टर कमाल अमरोही ने 1956 में इस फिल्म का सपना देखा था, तो उन्हें अंदाजा नहीं था कि इसे स्क्रीन पर आने में 1972 तक का समय लगेगा. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस बीच, फिल्म पांच बार रोकी गई, लेकिन रिलीज होने पर इसने सफलता का नया बेंचमार्क सेट किया.

कहा जाता है कि डायरेक्टर कमाल अमरोही अपनी पत्नी, मशहूर एक्ट्रेस मीना कुमारी के लिए एक ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे, जिसे सदियों तक याद रखा जाए. 1956 में शूटिंग शुरू हुई. उस समय, फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट में बनने वाली थी. लेकिन फिर कलर फिल्मों का दौर आया, और कमाल अमरोही ने शूटिंग फिर से शुरू करने का फैसला किया. यह पहली बार था जब फिल्म का काम रुका था.

फिल्म पांच बार क्यों रुकी?: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लैक एंड व्हाइट से कलर में बदलाव, और फिर ‘सिनेमास्कोप’ लेंस के आने से फिल्म को बार-बार शुरू से शुरू करना पड़ा. 1964 में, कमाल अमरोही और मीना कुमारी के बीच अनबन हो गई और वे अलग हो गए. फिल्म पूरी तरह से रोक दी गई. ऐसा लग रहा था कि ‘पाकीजा’ कभी पूरी नहीं होगी.
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दूसरी ओर, फिल्म का बजट इतना बढ़ गया कि प्रोड्यूसर के पास पैसे खत्म हो गए. जैसे ही फिल्म के सेट पर धूल जमने लगी, फिल्म के ओरिजिनल म्यूजिक डायरेक्टर गुलाम मोहम्मद गुजर गए, जिससे फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर अधर में लटक गया. बाद में नौशाद ने इसे पूरा किया. जब सालों बाद शूटिंग फिर से शुरू हुई, तो मीना कुमारी लिवर सोरायसिस से बहुत बीमार थीं. वह खड़ी भी नहीं हो पाती थीं, लेकिन उन्होंने फिल्म पूरी करने की जिद की.

सुनील दत्त और नरगिस का दखल: जब फिल्म सालों तक रुकी रही, तो सुनील दत्त और नरगिस ने फिल्म की फुटेज देखी. वे हैरान रह गए और उन्होंने मीना कुमारी और कमाल अमरोही को एक साथ आकर इस मास्टरपीस को पूरा करने के लिए मनाया. 1969 में शूटिंग फिर से शुरू हुई. जब यह 4 फरवरी, 1972 को रिलीज हुई, तो शुरू में इसे ठंडा रिस्पॉन्स मिला.

उस दौरान क्रिटिक्स ने कहा था कि फिल्म ‘पुरानी’ लग रही है. लेकिन रिलीज होने के ठीक दो महीने बाद, 31 मार्च, 1972 को मीना कुमारी गुजर गईं. उनकी मौत की खबर ने दर्शकों को हिलाकर रख दिया और रातों-रात फिल्म की डिमांड आसमान छू गई. थिएटर के बाहर मीलों लंबी लाइनें लग गईं, जिससे ‘पाकीजा’ ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर बन गई. इस फिल्म में मीना कुमारी के साथ राज कुमार लीड रोल में नजर आए थे.

‘पाकीजा’ की सफलता के पीछे मीना कुमारी का डेडिकेशन था, जहां उन्होंने अपनी खराब सेहत के बावजूद शूटिंग पूरी की. कमाल अमरोही 16 साल तक पक्के इरादे वाले रहे. आज भी, यह फिल्म अपने म्यूजिक (जैसे, ‘इन्हीं लोगों ने ले लीं,’ ‘चलते चलते’) और शानदार सिनेमैटोग्राफी के लिए दुनिया भर में जानी जाती है.
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