हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कुछ भी असंभव नहीं है. कभी-कभी फिल्में किसी और एक्टर के साथ प्लान की जाती हैं, लेकिन स्क्रीन पर आते-आते उनमें सबकुछ बदल जाता है. हम एंटरटेनमेंट वर्ल्ड में अक्सर सुनते हैं कि फिल्म के लिए कोई एक्टर पहली पसंद था, लेकिन फिर उसके साथ बात बन नहीं पाई. अनुराग कश्यप की गैंग्स ऑफ वासेपुर एक ऐसी ही फिल्म थी.
अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ बॉलीवुड की बेहतरीन फिल्मों में शामिल है. इसकी गिनती क्लासिक फिल्मों में होती है. इसमें मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, हुमा कुरैशी, ऋचा चड्ढा, पंकज त्रिपाठी, जयदीप अहलावत समेत सितारों की एक पूरी फौज नजर आई थी.

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ को अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया था. आज यह फिल्म अपने बड़े कलाकारों और चर्चित डायलॉग्स के लिए याद की जाती है. लेकिन शुरुआती दौर में इसकी कहानी बिल्कुल अलग थी. फिल्म में राजकुमार राव अहम किरदार में नजर आने वाले थे.

फिल्म की शुरुआती कहानी में राजकुमार राव और नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक-दूसरे को टक्कर देने वाले थे. फिल्म दो प्रतिद्वंद्वी किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती थी. इनमें से एक किरदार राजकुमार के लिए तय किया गया था. उस समय राजकुमार को लव सेक्स और धोखा में नोटिस किया गया था.
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एक्टर कहते हैं कि अनुराग कश्यप ने वो फिल्म देखी और जल्द ही उनसे संपर्क किया. उस वक्त राजकुमार के लिए अनुराग कश्यप का कॉल ही किसी बड़ी अचीवमेंट से कम नहीं था. पहले जो भूमिका उन्हें दी गई थी, वह कोई छोटी भूमिका नहीं थी. यह नवाजुद्दीन सिद्दीकी के सामने समानांतर मुख्य भूमिका थी.

राजकुमार ने बताया कि फिल्म की कहानी शुरुआत में उनके और नवाजुद्दीन के किरदारों की प्रतिद्वंद्विता पर आधारित थी. दोनों अभिनेता अपने किरदारों की तैयारी में भी जुट गए थे. वे लगभग दस दिन वासेपुर इलाके में रहे. मकसद था वहां की बोली और माहौल को समझना. सब कुछ यही इशारा कर रहा था कि दोनों किरदारों का महत्व बराबर होगा.

फिर अचानक एक दिन कहानी में ट्विस्ट आ गया. अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्म की कहानी पूरी तरह बदल दी. एक दिन अनुराग कश्यप ने राजकुमार को फोन कर बड़ी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि स्क्रिप्ट अब एक बड़ी कहानी में बदल गई थी. फिल्म को अब दो हिस्सों में बनाने की योजना थी. नतीजतन, राजकुमार का किरदार अब कहानी के केंद्र में नहीं था.

निर्देशक ने इस बदलाव के बारे में साफ-साफ बता दिया. राजकुमार को कहा गया कि अगर वह फिल्म छोड़ना चाहें तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है. उनकी भूमिका पहले के मुकाबले काफी छोटी हो गई थी. एक अभिनेता के लिए, जो खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा था, यह फैसला लेना मुश्किल था. फिर भी, राजकुमार ने फिल्म में बने रहने का फैसला किया.

अब जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें कोई पछतावा नहीं है. राजकुमार ने कहा है कि गैंग्स ऑफ वासेपुर में छोटी भूमिका भी उनके लिए फायदेमंद साबित हुई. फिल्म का सेट भविष्य की कई मुलाकातों का जरिया बना. गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 के दौरान ही उनकी मुलाकात कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा से हुई. यही मुलाकात उनके करियर में बदलाव लेकर आई.

मुकेश छाबड़ा ने बाद में राजकुमार को हंसल मेहता से मिलवाया. इसी मुलाकात से 2012 की फिल्म ‘शाहिद’ बनी. यह फिल्म राजकुमार के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई. उनके अभिनय की पूरे इंडस्ट्री में तारीफ हुई. इससे उन्हें एक गंभीर कलाकार के तौर पर पहचान मिली.
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