अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की फिल्म ‘भूत बंगला’ में राजपाल यादव भी नजर आएंगे। तीनों की यह तिकड़ी पहले ‘भूल भुलैया’ में काम कर चुकी है। राजपाल कहते हैं कि ‘भूत बंगला’ की कहानी सिर्फ एक हॉरर कॉमेडी नहीं, बल्कि एक रहस्य से भरी दुनिया है। टीजर में दिखाया गया ‘वधुसुर’ और मंगलपुर की हवेली दरअसल उस बड़े रहस्य की झलक भर है।’ करीब 25 साल के करियर में सैकड़ों किरदार कर चुके राजपाल खुद को आज भी छात्र ही मानते हैं। वह कहते हैं कि ‘जब एक्टर किरदार की सोच को समझ लेता है तो उसकी बॉडी लैंग्वेज अपने आप बदल जाती है। मैं कभी किसी की नकल नहीं करता हूं।’ प्रियन सर के साथ काम करना मनोरंजन का विज्ञान पढ़ने जैसा राजपाल बताते हैं कि, ‘प्रियदर्शन के साथ मेरा रिश्ता दो दशक से भी पुराना है। मैंने कभी उनसे स्क्रिप्ट तक नहीं पूछी। जब भी उनका फोन आता है, सिर्फ यही कहते हैं-“राजपाल, आना है…’ तो मैं बिना कुछ पूछे सेट पर पहुंच जाता हूं। इस फिल्म में हॉरर और कॉमेडी दोनों है। प्रियदर्शन सर के साथ काम करना किसी यूनिवर्सिटी में मनोरंजन का विज्ञान पढ़ने जैसा है। जहां हर एक्टर छात्र होता है।’ ‘छोटा पंडित’ के बाद मेरा नया किरदार भी दर्शक पसंद करेंगे “भूल भुलैया’ के बाद से ‘छोटा पंडित’ के नाम से भी लोकप्रियता मिली। इस पर राजपाल का कहना है कि ‘कोई दबाव महसूस नहीं होता। एक कलाकार के लिए हर किरदार ‘रसगुल्ले’ की तरह होता है, छोटा हो या बड़ा उसका स्वाद मीठा ही होता है। ‘भूत बंगला’ में भी मेरा किरदार बारीकी से गढ़ा गया है और प्रियदर्शन सर ने इसमें आम आदमी के ऐसे शेड्स दिए हैं, जिनसे दर्शक आसानी से जुड़ पाएंगे और पसंद भी करेंगे।’ ‘भूत बंगला’ की हवेली का आर्किटेक्चर ही डर पैदा करता है बकौल राजपाल, ‘किसी भी फिल्म में लोकेशन सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि एक किरदार होती है। जहां ‘भूल भुलैया’ की हवेली में राजपूताना ठाठ और रहस्य का माहौल था, वहीं ‘भूत बंगला’ की हवेली का आर्किटेक्चर और अंधेरा अपने आप में अलग तरह का डर पैदा करता है। प्रियदर्शन सर ने इसे ब्यूटीफुल हॉरर की तरह ट्रीट किया है, जिससे दर्शकों को लगेगा कि वे खुद उस बंगले के भीतर मौजूद हैं।’ अक्की पाजी के साथ काम करना हमेशा रोलर कोस्टर जैसा अक्षय के साथ फिर से काम करने को लेकर राजपाल कहते हैं कि ‘अक्की पाजी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह हर वक्त लाइव एक्टर जैसे रहते हैं। कैमरा ऑन हो या ऑफ, सेट पर उनका एनर्जी लेवल वही रहता है। शॉट के बीच भी दोनों कलाकार लगातार रिहर्सल करते रहते हैं और सीन में छोटे-छोटे इम्प्रोवाइजेशन जोड़ते हैं ताकि सीन और ज्यादा जीवंत बन सके। अक्षय के साथ काम करना हमेशा रोलर कोस्टर जैसा अनुभव होता है।’
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