हर्षवर्धन राणे का मानना है कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती. हाल ही में उन्होंने एक बड़ी दिलचस्प बात कही कि वह उन पॉडकास्ट या इंटरव्यू का हिस्सा बनना पसंद नहीं करते, जहां घंटों बैठकर सिर्फ अपने संघर्षों और परेशानियों का रोना रोया जाता है. हर्षवर्धन के मुताबिक, उनके पास ऐसी बातों के लिए वक्त ही नहीं है क्योंकि उनका पूरा ध्यान हमेशा अपने काम और लक्ष्य पर रहा है. 16 साल की उम्र में घर छोड़ने वाले इस एक्टर का कहना है कि उनका निश्चय उनके संघर्ष से कहीं ज्यादा बड़ा है, इसलिए उन्हें चुनौतियां कभी डरा नहीं पाईं.
हर्षवर्धन राणे ने बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया.
कठिनाइयों का साइज कभी बड़ा नहीं लगा
आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में हर्षवर्धन ने कहा, ‘मेरा निश्चय इतना दृढ़ रहा है कि कठिनाइयां कभी मेरे लिए बड़ी हो ही नहीं पाईं. मेरा डिटरमिनेशन फैक्टर मेरे स्ट्रगल से बहुत बड़ा है. कठिनाइयों का साइज मेरे सामने कभी बड़ा नहीं लगा.’
डेढ़-दो घंटे तक अपनी मुश्किलों पर बात नहीं कर सकता
एक्टर ने यह भी बताया कि वह पॉडकास्ट या ऐसे इंटरव्यू में शायद ही बैठते हैं जहां लोग घंटों अपनी मुश्किलों, किसी ने क्या गलत कहा या उनके साथ क्या गलत हुआ, इस पर बात करते हैं. हर्षवर्धन ने कहा, ‘मेरे पास वो मटेरियल ही नहीं है. मैं डेढ़-दो घंटे तक कठिनाइयों के बारे में बात नहीं कर सकता. मेरे लिए वो कभी मैटर किया ही नहीं. मेरा लक्ष्य और इच्छाएं इतनी बड़ी हैं कि फोकस कभी स्ट्रगल पर नहीं गया.’
सपनों पर चुनौतियों को नहीं होने दिया हावी
हर्षवर्धन राणे ने आगे कहा, ‘मैंने कभी अपने सपनों पर चुनौतियों को हावी नहीं होने दिया. यही वजह है कि मैं बेहतर तरीके से काम कर पाता हूं. मेरा पूरा ध्यान काम की क्वालिटी, प्रोड्यूसर के फायदे और दर्शकों की खुशी पर रहता है.’
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साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें
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