ऋषभ रिखीराम शर्मा युवा सितार वादक हैं, जो क्लासिकल संगीत को मॉडर्न अंदाज में पेश करने के लिए जाने जाते हैं. वे अक्सर दिग्गज संगीतकार पंडित रविशंकर की परंपरा से प्रेरणा लेने की बात करते रहे हैं. हाल में उनके ‘अंतिम शिष्य’ होने के दावे पर बहस छिड़ी, जिस पर अनुष्का शंकर ने रिएक्ट किया और सच्चाई को बयां किया.
नई दिल्ली. भारतीय शास्त्रीय संगीत की नई पीढ़ी में जिस नाम ने पिछले कुछ सालों में तेजी से पहचान बनाई है, वह है ऋषभ रिखीराम शर्मा… डिजिटल दौर में सितार को युवाओं तक पहुंचाने की उनकी कोशिशें, स्टोरीटेलिंग के साथ कॉन्सर्ट और मेंटल हेल्थ पर केंद्रित पहल ने उन्हें अलग पहचान दी है. लेकिन उन्होंने हाल ही में दिग्गज पंडित रविशंकर की परंपरा से अपने रिश्ते को लेकर हाल में बहस भी छिड़ कर नए विवाद को जन्म दे दिया. जिसके बाद लोग ये जानना चाह रहे हैं कि आखिर ये ऋषभ रिखीराम शर्मा कौन हैं?

नए विवाद के बाद युवा सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा सुर्खियों में छाए हुए हैं. उन्होंने खुद को दिग्गज संगीतकार पंडित रविशंकर का ‘अंतिम और सबसे युवा शिष्य’ बताया है. अब इस दावे पर पंडित रविशंकर की बेटी और प्रसिद्ध सितार वादक अनुष्का शंकर ने सफाई देते हुए इसे गलत बताया है, जिसके बाद यह मामला गरमा गया है.

युवा सितार वादक और संगीतकार ऋषभ रिखीराम शर्मा भारतीय शास्त्रीय संगीत को आधुनिक और युवा-मैत्रीपूर्ण अंदाज में पेश करने के लिए जाने जाते हैं. दिल्ली में जन्मे ऋषभ एक संगीत वाद्ययंत्र बनाने वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जहां उनकी चार पीढ़ियां रिक्हीराम ब्रांड के तहत सितार और अन्य वाद्ययंत्र बनाती आई हैं.
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उनके पिता संजय रिखीरामशर्मा विश्व प्रसिद्ध वाद्ययंत्र निर्माता हैं, जिन्होंने पंडित रवि शंकर, जॉर्ज हैरिसन और हर्बी हैनकॉक जैसे दिग्गजों के लिए सितार बनाए हैं. ऋषभ ने 10 साल की उम्र में सितार बजाना शुरू किया और 17 साल की उम्र में उच्च अध्ययन के लिए न्यूयॉर्क चले गए, जहां उन्होंने क्वींस कॉलेज से संगीत प्रोडक्शन और अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल की . 2022 में, वह व्हाइट हाउस में दीवाली समारोह में एकल प्रदर्शन करने वाले पहले भारतीय शास्त्रीय संगीतकार बने. उन्होंने ‘सितार फॉर मेंटल हेल्थ’ नामक एक पहल भी शुरू की है, जिसके तहत वह संगीत के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देते हैं .

कई इंटरव्यू में ऋषभ कह चुके हैं कि उनकी प्रेरणा पंडित रवि शंकर की सोच और परंपरा से आती है. उन्होंने कहा था कि गुरुजी ने सिर्फ रचनाएं नहीं, बल्कि सोचने का तरीका सिखाया- ‘कॉपी मत करो, मेरी तरह सोचो.’ ऋषभ मानते हैं कि यही कारण है कि कुछ लोगों को उनके संगीत में उस विरासत की झलक मिलती है. ऋषभ का दावा है कि गुरुजी की मृत्यु (2012) के बाद उनके वरिष्ठ शिष्यों ने उन्हें आगे पढ़ाया. उन्होंने WION को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मेरा संगीत सुनकर कई लोग कहते हैं कि यह गुरुजी की याद दिलाता है.’सोशल मीडिया पर समय-समय पर यह दावा उभरता रहा कि ऋषभ पंडित रवि शंकर के ‘सबसे कम उम्र’ या ‘आखिरी शिष्य’ थे.

इस बहस के बीच पंडित जी की बेटी और विश्वप्रसिद्ध सितार वादक अनुष्का शंकरने हाल में Humans of Bombay को दिए इंटरव्यू में स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने ऋषभ की प्रतिभा की तारीफ करते हुए कहा कि वे लोगों से बहुत खूबसूरती से जुड़ते हैं. हालांकि, गुरु-शिष्य संबंध को लेकर उन्होंने कहा कि ऋषभ ने उनके पिता के वरिष्ठ शिष्य परिमल सदाफल से गहन प्रशिक्षण लिया था. पंडित रवि शंकर से उनकी कुछ अनौपचारिक कक्षाएं हुई थीं, लेकिन औपचारिक दीक्षा नहीं हुई थी.

अनुष्का ने यह भी बताया कि दोनों परिवारों का पुराना रिश्ता रहा है क्योंकि ऋषभ के पिता संजय रिखीराम शर्मा उनके परिवार के वाद्य निर्माता रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि समय के साथ यह कहानी बढ़ते-बढ़ते ‘आखिरी शिष्य’ जैसी धारणा बन गई, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है. लेकिन वे सुपर टैलेंटेड हैं और सफलता के हकदार हैं, चाहे उस कहानी के साथ या बिना.

अनुष्का ने उनकी सराहना की और कहा कि इसे विभिन्न दर्शकों तक पहुंचाना अच्छी बात है. इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कुछ यूजर्स ने अनुष्का पर ईर्ष्या का आरोप लगाया, जबकि अन्य ने कहा कि दावे बढ़ा-चढ़ाकर किए गए. कुछ ने ऋषभ की प्रतिभा और मानसिक स्वास्थ्य पहल की तारीफ की, लेकिन कहा कि ‘अंतिम शिष्य’ का टैग गलत है.
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