महान फिल्मकार रामानंद सागर के बेटे आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का साल की आयु में निधन हो गया. वे पिछले 10-12 सालों से पार्किंसन बीमारी से जूझ रहे थे. उनका अंतिम संस्कार 13 फरवरी 2026 को मुंबई में हुआ. सागर आर्ट्स की दूसरी पीढ़ी के अहम मेंबर के रूप में उन्होंने 2008 की ‘रामायण’, ‘अलिफ लैला’ और ‘आंखें’ जैसे मशहूर प्रोजेक्ट्स में अहम योगदान दिया. उन्होंने अपने पिता की विरासत को मॉडर्न तकनीक के साथ आगे बढ़ाया. उनके निधन से एंटरटेनमेंट जगत में मातम पसर गया है.
आनंद सागर ने पिता की विरासत को सफलता के साथ आगे बढ़ाया था. (फोटो साभार: Instagram)
आनंद सागर ‘सागर आर्ट्स’ की दूसरी पीढ़ी के उस लीडरशिप का हिस्सा थे, जिसने भारतीय टेलीविजन पर पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियों को एक नई पहचान दी. उन्होंने अपने पिता रामानंद सागर की विरासत को आगे बढ़ाते हुए 2008 में ‘रामायण’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने न केवल निर्देशन के क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी, बल्कि फिल्ममेकिंग की बारीकियों से भी जुड़े रहे. उन्होंने अपने एक्टिव सालों में ‘अलिफ लैला’ जैसे लोकप्रिय सीरियल और ‘आंखें’ व ‘अरमान’ जैसी फिल्मों के जरिए सागर परिवार का नाम एंटरटेनमेंट की दुनिया में निरंतर ऊंचाइयों को छूता रहा. उन्होंने तकनीकी रूप से टेलीविजन प्रोडक्शन को संपन्न बनाने में भी अहम योगदान दिया था.
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