ये सितारा मथुरा से कई बार से सांसद बन रहीं ना तो हेमामालिनी हैं और ना ही शत्रुध्न सिन्हा. सनी देयोल से लेकर विनोद खन्ना भी नहीं. धर्मेंद्र तो एक खैर एक बार ही लोकसभा में चुने जाने के बाद इस दौड़ से हट ही गए. रेखा भी राज्यसभा पहुंची लेकिन एक उनका कार्यकाल भी बस छोटा ही रहा.
तो अंदाज लगा सकते हैं कि ये कौन हैं. ये बॉलीवुड की महिला स्टार हैं. उनके पति सदी के महानायक कहलाते हैं. 70 और 80 के दशक में वह खुद रूपहले पर्दे की बड़ी स्टार थीं. उनकी कई फिल्में सुपरहिट रहीं. अब वह राजनीति में लंबी पारी खेल रही हैं. लगातार 22 सालों से ज्यादा समय से संसद में हैं. लगातार चुनी जाती रही हैं.
अब भी वह राज्यसभा में हैं
हां, वह जया बच्चन ही हैं. उन्होंने बॉलीवुड सितारों में राजनीति की सबसे लंबी और लगातार चलने वाली पारी खेली है. वह 2004 से लगातार राज्यसभा सांसद हैं. वह फिलहाल अपने पांचवें कार्यकाल में हैं. राज्यसभा में एक कार्यकाल 6 साल का होता है. उनका मौजूदा कार्यकाल 2024 में शुरू हुआ है और 2030 तक चलेगा.
वह हमेशा से समाजवादी पार्टी की ओर उत्तर प्रदेश से चुनकर राज्यसभा पहुंचती रही हैं. सदन में उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड काफी बेहतर रहा है, जो उन्हें अन्य ‘सेलिब्रिटी सांसदों’ से अलग खड़ा करता है. यहां उनकी कुल उपस्थिति लगभग 83% रही है, जो राष्ट्रीय औसत (80%) से अधिक है यानि किसी संजीदा और खांटी राजनीतिज्ञों से भी ज्यादा.
मौजूदगी का रिकॉर्ड बहुत बढिया, एक्टिव भी खूब
पिछले कुछ सत्रों जैसे मानसून सत्र 2023, शीतकालीन सत्र 2021 और 2025 में तो उनकी उपस्थिति 100% तक रही है. हालांकि, करियर के शुरुआती दौर में उनकी उपस्थिति कम थी लेकिन समय के साथ इसमें काफी सुधार होता गया. जया बच्चन को सदन के सबसे मुखर और सक्रिय सदस्यों में गिना जाता है. उन्होंने अब तक करीब 338 बहसों में हिस्सा लिया है, जो राष्ट्रीय औसत (262) से कहीं ज्यादा है. सदन में अब तक 451 प्रश्न पूछे. ये भी किसी भी नेता की तुलना में उन्हें आगे रखते हैं.
जया सदन में अक्सर महिला सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, विकलांगों के अधिकार, सोशल मीडिया पर अश्लीलता पर रोक और फिल्म उद्योग से संबंधित मुद्दों पर आवाज उठाती रही हैं. वह सदन की कार्यवाही और प्रक्रिया को लेकर काफी सख्त रहती हैं. हाल के वर्षों में सभापति के साथ उनकी तीखी नोकझोंक और “श्रीमती जया अमिताभ बच्चन” कहे जाने पर उनकी आपत्ति काफी चर्चा में रही है.
(फोटो साभार: Instagram@officialsunitaahuja)
सुनील दत्त भी पांच बार लोकसभा के लिए चुने गए
जया बच्चन के अलावा सुनील दत्त का भी सदन में दबदबा रहा है. वह लोकसभा के लिए पांच बार चुने गए यानि 1984, 1989, 1991, 1999 और 2004 में. अपने पांचवें कार्यकाल के दौरान ही उनका निधन हो गया. तब युवा मामलों और खेल के केंद्रीय मंत्री थे. सुनील दत्त हमेशा कांग्रेस पार्टी के साथ रहे. उन्हें एक साफसुथरे और ईमानदार सांसद के तौर पर याद किया जाता रहा है.
शत्रुध्न और हेमा की स्थिति
इसके अलावा शत्रुध्न सिन्हा और हेमामालिनी ऐसे बॉलीवुड स्टार हैं, जो राजनीति में भी कई सालों से लगातार सक्रिय रहे हैं. वो दोनों राज्यसभा का हिस्सा रहे तो लोकसभा के लिए भी चुने जाते रहे. शत्रुघ्न सिन्हा दो बार राज्यसभा (1996-2008) और तीन बार लोकसभा (2009, 2014, 2022-उपचुनाव) के सदस्य रहे.
हेमा मालिनी 2003 से राजनीति में सक्रिय हैं. 2003-2009 तक राज्यसभा सदस्य रहीं. 2014 से लगातार मथुरा से लोकसभा सांसद हैं. बॉलीवुड के सुपरस्टार रहे विनोद खन्ना पंजाब के गुरदासपुर से 4 बार (1998, 1999, 2004 और 2014) लोकसभा सांसद चुने गए.
हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा ज्यादा लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं लेकिन जब बात सांसद के रूप में बिताए गए समय की आती है, तो जया बच्चन तकनीकी रूप से आगे निकल जाती हैं. सिन्हा का सियासी करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा. वह 1996 से 2008 तक राज्यसभा में रहे. फिर उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने पड़े. 2019 में चुनाव हारने के कारण वह लगभग 3 साल तक संसद से बाहर रहे, जब तक कि उन्होंने 2022 में आसनसोल उपचुनाव नहीं जीता.
हालांकि जया बच्चन हमेशा से समाजवादी पार्टी के साथ वफादार रहीं तो शत्रुघ्न सिन्हा ने लंबे समय तक BJP में रहने के बाद कांग्रेस और फिर तृणमूल का रुख किया.
बॉलीवुड के दूसरे सितारे
बॉलीवुड सितारों का राजनीति में आना और फिर उसे छोड़ देना एक आम सिलसिला रहा है. ज्यादातर सितारों ने संसद में एक टर्म के बाद ही राजनीति से तौबा कर ली.
अमिताभ बच्चन इलाहाबाद में 1984 में बहुत बड़े अंतर से लोकसभा चुनाव जीते. उन्होंने दिग्गज नेता हेमवती बहुगुणा को हराया लेकिन 1987 में ही उन्होंने राजनीति को टाटा-बाय-बाय कर दिया. लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ दी. उन्होंने बाद में स्वीकार किया कि वह राजनीति के लिए नहीं बने थे. “बोफोर्स घोटाले” में नाम उछाले जाने के विवाद से वह काफी आहत हुए थे.
राजेश खन्ना नई दिल्ली में 1992 में लोकसभा चुनाव में जीते. बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार ने राजनीति में भी काफी पसीना बहाया. उन्होंने 1991 में लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ा. तब वह बहुत कम अंतर से हारे. बाद में उपचुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. 1996 के बाद सक्रिय चुनावी राजनीति छोड़ दी. हालांकि वह अपनी आखिरी सांस तक कांग्रेस के लिए प्रचार करते रहे लेकिन दोबारा सदन नहीं गए.
गोविंदा ने मुंबई उत्तर में कांग्रेस के लिए 2004 में लोकसभा चुनाव लड़ा. जीता. उन्होंने राजनीति में “जायंट किलर” के रूप में प्रवेश किया. तब उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता राम नाइक को हराया. सांसद रहते हुए उनकी उपस्थिति बहुत कम रही. उन पर आरोप लगा कि वह जनता के लिए उपलब्ध नहीं रहते. उन्होंने 2008-09 में राजनीति छोड़ दी ताकि फिल्मों पर ध्यान दे सकें. हालांकि 2024 में उन्होंने फिर से शिवसेना के जरिए राजनीति में कदम रखा है.
धर्मेंद्र ने वर्ष 2004 में बीकानेर से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता. उनका मन वहां कभी नहीं लगा. सदन में उनकी उपस्थिति बहुत कम रही.उन्होंने बाद में एक इंटरव्यू में कहा था कि “राजनीति उनके जैसे भावुक इंसान के लिए नहीं है”. वह वहां ‘घुटन’ महसूस करते थे.
रेखा वर्ष 2012 में राज्यसभा में मनोनीत की गईं. उनका कार्यकाल सबसे विवादास्पद रहा क्योंकि उनकी अटेंडेंस केवल 5% के आसपास थी. उन्होंने सदन की कार्यवाही में लगभग शून्य भागीदारी दिखाई. कार्यकाल खत्म होने के बाद वह पूरी तरह निष्क्रिय हो गईं.
मिथुन चक्रवर्ती भी वर्ष 2014 में तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा पहुंचे. स्वास्थ्य कारणों और शारदा चिट फंड घोटाले में पूछताछ के बाद उपजे विवादों के चलते उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वह बीजेपी से जुड़े लेकिन चुनाव नहीं लड़ा.
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