एक तरफ, जहां 100-200 करोड़ की लागत वाली फिल्में बन रही हैं और पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ लव रंजन और अंकुर गर्ग ने बहुत कम बजट में शायद 20 से 30 करोड़ के बीच, एक ऐसी फिल्म बनाई है जिससे दूसरे फिल्ममेकर्स को जरूर प्रेरणा लेनी चाहिए. कोई बड़ा सुपरस्टार नहीं, कोई शानदार सेट नहीं और कोई फालतू तामझाम नहीं… एक सिंपल कहानी जिसमें सस्पेंस को इस तरह से बुना गया है, बिना किसी शोर-शराबे या हिंसा के, कि आप क्लाइमैक्स तक सोचते रहते हैं कि सच क्या है? दमदार कंटेंट के साथ जो आपको पलक झपकाने का भी मौका नहीं देता… संजय मिश्रा और नीना गुप्ता अपने उसी ‘वध (2022)’ वाले अवतार में… ये सब मिलकर एक परफेक्ट सिनेमैटिक अनुभव बनाते हैं.
‘वध 2’ को समझने के लिए, हमें ‘वध 1’ को याद करना होगा, जहां एक आम रिटायर्ड टीचर शंभूनाथ मिश्रा, अपनी पत्नी और अपनी इज्जत बचाने के लिए एक बेरहम अपराधी प्रजापति (सौरभ शुक्ला) को मार देता है. पहले पार्ट की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उसने इस हत्या को ‘वध’ कहा, न कि ‘मर्डर’. दर्शकों ने शंभूनाथ का उसके अपराध में भी साथ दिया. पहले पार्ट ने हमें सिखाया कि जब कानून फेल हो जाता है, तो एक लाचार आदमी हथियार उठाने पर मजबूर हो जाता है.
सबसे पहले, हम आपको बता दें कि ‘वध 2’ की कहानी का ‘वध’ से कोई लेना-देना नहीं है. ‘वध 2’ में आपको एक बिल्कुल नई कहानी देखने को मिलेगी, जहां शंभूनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) मध्य प्रदेश की शिवपुरी जेल में तैनात एक पुलिसकर्मी है. उसकी पत्नी गुजर चुकी है, और उसका एक बेटा है जो उसे छोड़कर अपने परिवार के साथ विदेश में रहता है. शंभूनाथ ने अपने बेटे को पढ़ाने के लिए बहुत सारा लोन लिया है और उसकी सैलरी से यह कर्ज चुकाना मुमकिन नहीं है. इसलिए वह जेल के अंदर सब्जियां उगाता है और फिर उन्हें बाहर बेचता है. इसी बीच, मंजू मिश्रा (नीना गुप्ता) को उसी जेल में दो मर्डर के लिए उम्रकैद की सजा काटते हुए दिखाया गया है. इन सबके बीच, नैना (योगिता बिहानी) नाम की एक लड़की जेल में आती है और फिर फिल्म की असली कहानी शुरू होती है.
संजय मिश्रा: एक ‘शानदार’ परफॉर्मेंस
इस फिल्म में संजय मिश्रा ने जो काम किया है, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है. उनकी आंखों की खामोशी, जो कभी पछतावे से तो कभी दृढ़ संकल्प से भरी होती है, दर्शकों को बांधे रखती है. वह बिना कुछ बोले इतना कुछ कह जाते हैं कि बड़े-बड़े सुपरस्टार भी उनके सामने छोटे लगते हैं. ‘वध 2’ में उनके किरदार में और भी परतें हैं.
नीना गुप्ता: मंजू मिश्रा का डर और हिम्मत
नीना गुप्ता ने मंजू मिश्रा के किरदार में पहली फिल्म के मुकाबले इस भाग में कहीं ज्यादा हिम्मत दिखाई है. उनके और संजय मिश्रा के बीच के छोटे-छोटे सीन, जहां वे एक-दूसरे को दिलासा देते हैं, फिल्म के सबसे इमोशनल हिस्सों में से हैं. अपनी जिंदगी के इस पड़ाव पर, नीना गुप्ता ने साबित कर दिया है कि एक्टिंग की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती.
डायरेक्टर जसपाल सिंह संधू ने फिल्म का डार्क टोन और बैकग्राउंड स्कोर इतनी अच्छी तरह से बनाए रखा है कि आपको हर पल एक अनजान दबाव महसूस होता है. बॉलीवुड अभी बड़े बजट की फिल्मों से भरा हुआ है, लेकिन ‘वध 2’ दिखाती है कि अगर आपकी कहानी में दम है, तो आपको शानदार लोकेशन या चकाचौंध की जरूरत नहीं है. यह फिल्म बुढ़ापे के अकेलेपन, सिस्टम की असंवेदनशीलता और एक आम आदमी की लाचारी को खूबसूरती से दिखाती है.
कमियां
जहां ‘वध 2’ अपनी कहानी और एक्टिंग में बेहतरीन है, वहीं कुछ मामलों में यह थोड़ी कमजोर पड़ती है. फिल्म की पेस पहली फिल्म के मुकाबले धीमी है, जिससे कम सब्र वाले दर्शक निराश हो सकते हैं. कुछ सीन बहुत ज्यादा अंधेरे हैं, जिससे विजुअल्स साफ नहीं दिखते.
आखिरी फैसला
‘वध 2’ सिर्फ एक सीक्वल नहीं है, यह एक विचारधारा है. यह फिल्म समाज के उन अंधेरे कोनों को उजागर करती है जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. अगर आप सिनेमा से सिर्फ मनोरंजन से ज्यादा चाहते हैं तो ‘वध 2’ आपके लिए बनी है. मेरी ओर से फिल्म 5 में 3.5 स्टार.
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