वहीं, अब इस सिलसिले को बरकरार रखते हुए पीपल मीडिया फैक्ट्री के बैनर तले बनी फिल्म ‘द राजा साब’ 9 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज किया जा चुका है. सुपरस्टार प्रभास, संजय दत्त, बोमन ईरानी और जरीना वहाब जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी यह फिल्म हॉरर, फैंटेसी, कॉमेडी और ड्रामा का अनोखा संगम पेश करती है. फिल्म का निर्देशन किया है मारुति दासारी ने, जबकि निर्माता हैं टीजी विश्वा प्रसाद. 3 घंटे 6 मिनट की इस भव्य फिल्म को तेलुगु, हिंदी, तमिल, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में रिलीज किया गया है.
फिल्म की कहानी की बात करें तो इसमें नयापन दिखता है. राजू (प्रभास) एक मस्तमौला युवक है, जो अपनी बीमार दादी के साथ सादा जीवन जी रहा है, लेकिन उसकी यह साधारण दुनिया एक शाही अतीत से जुड़ी है. कभी उसकी दादी एक रियासत की मालकिन हुआ करती थीं, मगर विश्वासघात और हालात ने उनसे सब कुछ छीन लिया. राजू के दादा कनकराजू (संजय दत्त) सालों पहले रहस्यमयी तरीके से लापता हो गए थे. कहा जाता है कि एक चोर का पीछा करते हुए वे जंगल की ओर गए और फिर कभी लौटे ही नहीं. डॉक्टरों का मानना है कि अगर दादी अपने पति को एक बार देख लें, तो उनकी मानसिक हालत सुधर सकती है.
यहीं से शुरू होती है राजू की अपने गायब हुए दादा को खोजने की यात्रा- जो उसे एक जंगल में स्थित एक पुराने महल, खौफनाक रहस्यों, और प्रेत आत्माओं की दुनिया के ऐसे सच तक ले जाती है, जो उसकी दादी की कहानी से बिल्कुल उलट है. क्या राजू अपने दादा को ढूंढ पाएगा? क्या उसकी दादी को इंसाफ और सम्मान मिलेगा? क्या है महल में रह रहे प्रेत आत्माओं का रहस्य? यह सब पता चलेगा आपको फिल्म देखने के बाद.
अभिनय की बात करें तो प्रभास राजू के किरदार में पूरी तरह रंगे हुए नजर आते हैं. कभी शरारती, कभी भावुक, कभी गुस्सैल और कभी निडर- उन्होंने अपने किरदार के हर शेड को मजबूती से पर्दे पर प्रस्तुत किया है. खासकर कॉमेडी और इमोशनल सीन्स में उनकी टाइमिंग शानदार है. फाइनल सीन्स में प्रभास के एक्सप्रेशंस बेहद प्रभावशाली हैं. वहीं, संजय दत्त का किरदार फिल्म का सबसे रहस्यमयी पहलू है. भारी आवाज, खौफनाक अंदाज और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के साथ वे एक ऐसे बुड्ढे के रूप में सामने आते हैं, जो दर्शकों को अपने दिमागी खेल और मायाजाल से अपने वश में कर लेगा.
बोमन ईरानी एक हिप्नोटिस्ट और आत्माओं के विशेषज्ञ की भूमिका में कहानी को नया मोड़ देते हैं. उनका किरदार फिल्म को लॉजिक और गहराई दोनों देता है. जरीना वहाब ने एक रियासत की मालकिन के रूप में असरदार और मानसिक रूप से पीड़ित महिला के रूप में भावनात्मक असर छोड़ा है. उनके हर एक सीन कहानी की आत्मा बन जाते हैं. मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल और रिद्धि कुमार भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में फिट बैठती हैं, लेकिन फिल्म की भावनात्मक पकड़ जरीना वहाब के हाथ में ही रहती है.
मारुति दासारी ने इतने सारे जॉनर को एक साथ ना सिर्फ संभाला है बल्कि स्मार्टली उनके बीच एक बैलेंस बना कर रखा है और शानदार तरीके से स्क्रीन पर उतार दिया है. बैकग्राउंड म्यूजिक हर सीन के मूड को और असरदार बनाता है. कुछ गाने भव्य सेट्स और सैकड़ों डांसर्स के साथ शूट किए गए हैं, जो साउथ के सिनेमा की कलर फुल पहचान को दर्शाते हैं. वीएफएक्स खासकर हॉरर सीक्वेंस में इंटरनेशनल लेवल के लगते हैं. संजय दत्त का प्रेत रूप दर्शकों को चौंकाता है. मेकअप, कॉस्ट्यूम और सेट डिज़ाइन फिल्म को रॉयल टच देते हैं.
फिल्म में कुछ एक कमजोरियां भी हैं जैसे कि फिल्म का मिड-पार्ट थोड़ा स्लो है, जहां कहानी की रफ्तार थम सी जाती है. लंबी होने के कारण फिल्म बीच-बीच में आपको थोड़ा बोर भी करती है, हालांकि आखिरी 40–45 मिनट पूरी तरह पैसा वसूल हैं- रहस्य खुलते हैं, इमोशन हावी होते हैं और क्लाइमैक्स दमदार बन पड़ता है. अगर आप हॉरर के साथ कॉमेडी, फैंटेसी, ड्रामा और स्टार पावर का मजा एक ही फिल्म में लेना चाहते हैं, तो ‘द राजा साब’ आपके लिए परफेक्ट है, जिसे आप अपने पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 3 स्टार.
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