विनोद खन्ना के ओरेगन प्रवास को लेकर उनकी दूसरी पत्नी विनोद खन्ना ने बड़ा खुलासे किए है. उन्होंने बताया कि ओशो के कम्यून में क्या-क्या होता है और कैसे एक्टर वहां से लौटकर आ गए. उन्होंने बताया कि वह अपने बच्चों को काफी याद करते थे. लौटने के बाद ओशो ने उन्हें पुणे आश्रम की जिम्मेदारी देने की पेशकश की, लेकिन पहली बार विनोद ने अपने गुरु को ‘ना’ कहा और फिर दोबारा उनसे मुलाकात नहीं की.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर विनोद खन्ना का करियर जितना चमकदार रहा, उतना ही चर्चा में उनका आध्यात्मिक मोड़ भी रहा. जब उन्होंने सब कुछ छोड़कर ओशो का दामन थाम लिया था. यह फैसला 1982 में उन्होंने लिया, जब इंडस्ट्री में कहा जा रहा था कि विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन को टक्कर दे सकते हैं. ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘हीरो’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी हिट फिल्मों के बाद उन्होंने 5 साल यानी 1982-1987 के लिए सिनेमा छोड़ दिया और ओशो के साथ पुणे आश्रम और फिर अमेरिका के ओरेगन कम्यून में रहने लगे. इस दौर की कई कहानियां समय-समय पर सामने आईं, लेकिन अब उनकी दूसरी पत्नी कविता खन्ना ने अपने यूट्यूब चैनल पर विस्तार से इस बारे में खुलासा किया है. फाइल फोटो

विनोद खन्ना के इस दौर पर कई लोगों ने बातें कीं, लेकिन अब उनकी पत्नी कविता खन्ना ने उस समय की परतें खोलते हुए बताया है कि अमेरिका के ओरेगन में बना कम्यून एक्टर के मन पर कितना गहरा असर छोड़ गया था. उन्होंने ओरेगन कम्यून की अराजकता, विनोद की भावनात्मक उथल-पुथल और बच्चों से दूरी के दर्द को बयां किया. फाइल फोटो

कविता ने बताया कि ओरेगन में ओशो के फॉलोअर्स एक कम्यून में रहते थे, जिसे नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री ‘वाइल्ड वाइल्ड कंट्री’ में भी दिखाया गया है. उस समय ओशो ‘बहुत ज्यादा साइलेंस’ में थे और फॉलोअर्स से ज्यादा बात नहीं करते थे. उनकी सेक्रेटरी मां आनंद शीला ने पूरा कंट्रोल संभाल लिया. कविता ने शीला को ‘तानाशाह’ बताया और कहा, ‘वे एक शहर बना रहे थे, चुनाव जीतना चाहते थे. पागलपन वाली चीजें हो रही थीं. उनके पास अपनी आर्मी थी, AK-47 जैसी बंदूकें भी थी. कोई समझ नहीं पा रहा था क्या हो रहा है. कम्यून में डर का माहौल था. फाइल फोटो
Add News18 as
Preferred Source on Google

कविता ने बताया कि एक बार आश्रम की पानी की सप्लाई में जहर मिला दिया गया था, जिससे विनोद खन्ना बीमार पड़ गए थे. वह बताती हैं- ‘पानी में जहर होने की वजह से विनोद बीमार हो गए. बहुत डर था, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वे अपने बच्चों से नहीं मिल पा रहे थे. वे मुझे बताते थे कि वे रोते रहते थे. भारत वापस नहीं जा सकते थे, क्योंकि अगर गए तो वापस नहीं आ पाते.’ विनोद की पहली पत्नी गीतांजलि से दो बेटे अक्षय और राहुल हैं, जिनसे अलग होना उन्हें अंदर से तोड़ रहा था. फाइल फोटो

विनोद खन्ना की दूसरी पत्नी कविता ने आगे कहा कि अच्छा हुआ कि विनोद कम्यून के ढहने से पहले ही बाहर निकल आए. उन्होंने बताया कि, उनके कजिन आए और उन्हें बाहर ले गए. उसके बाद ओशो और शीला दोनों गिरफ्तार हुए. शीला जेल में रही.’ ओरेगन से लौटने के बाद विनोद गहरे ट्रॉमा में थे. उन्होंने आगे कहा कि वे बहुत ट्रॉमेटाइज्ड थे. सेट पर जाते, कमाल का शॉट देते, फिर वैन में जाकर रोते रहते. फाइल फोटो

उन्होंने बताया कि ओशो दिल्ली आए तो विनोद उन्हें मनाली ले गए, जहां एक महीना साथ रहे. वापस लौटने पर ओशो ने विनोद से पुणे आश्रम की जिम्मेदारी संभालने को कहा, लेकिन विनोद ने पहली और आखिरी बार गुरु को ‘ना’ कह दिया. इसके बाद विनोद कभी ओशो से नहीं मिले. वे फिल्म इंडस्ट्री में वापस लौटे और बेहद सफल रहे. फाइल फोटो

कविता ने विनोद की स्पिरिचुअल जर्नी की शुरुआत भी बताई. उन्होंने बताया कि बचपन से ही वे स्पिरिचुअल थे. 17 साल की उम्र में ‘एक योगी की आत्मकथा’ किताब खरीदते समय ओशो उसी बुकस्टोर में थे, लेकिन पता नहीं चला. परिवार में कई मौतें (मां सहित 5) हुईं, तब मां की मौत पर वे ओशो के पास गए और सन्यास लिया. पुणे आश्रम में 3 साल तक उन्होंने पहले से साइन की फिल्में ‘हेरा फेरी’, ‘कुर्बानी’ पूरी कीं. शूटिंग के बाद पुणे लौटते, जहां उनका कमरा सिर्फ 4×6 फीट का था. फाइल फोटो

ओरेगन में विनोद ओशो के माली थे और ओशो के रॉब्स ट्राय करने के लिए इस्तेमाल होते थे, क्योंकि कंधे का साइज एक जैसा था. कविता ने कहा कि विनोद का सफर स्पिरिचुअल था, न कि सनसनीखेज. बाद में वे फिल्मों में लौटे, राजनीति में आए और 2017 में निधन तक सक्रिय रहे. फाइल फोटो
Discover more from Bollywood News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.