बॉलीवुड की सबसे डरावनी फिल्मों में शुमार ‘वीराना’ ने करोड़ों दर्शकों की नींद उड़ाई, लेकिन फिल्म की नन्ही एक्ट्रेस वैष्णवी मैकडोनाल्ड (जो उस वक्त 9 साल की थीं) के लिए यह डर पर्दे तक सीमित नहीं रहा. हाल ही में सिद्धार्थ कनन के साथ एक इंटरव्यू में वैष्णवी ने रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा किया कि कैसे फिल्म के बाद वह असल जिंदगी में एक ‘भूतिया साये’ की गिरफ्त में आ गई थीं. सड़क पर पड़े एक अंडे को छूने की छोटी सी भूल ने उनकी रातों को खौफनाक बना दिया था. ‘शक्तिमान’ की ‘गीता विश्वास’ के नाम से मशहूर इस एक्ट्रेस की यह आपबीती किसी फिल्मी पटकथा से भी ज्यादा डरावनी और हैरान कर देने वाली है.
नई दिल्ली. बॉलीवुड और टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री वैष्णवी मैकडोनाल्ड आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. लेकिन, हाल ही में सिद्धार्थ कनन के साथ एक पॉडकास्ट में उन्होंने अपनी जिंदगी के उस डरावने अध्याय से पर्दा उठाया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं. वैष्णवी ने बताया कि उनकी पहली फिल्म ‘वीराना’ की शूटिंग के बाद वह असल जिंदगी में एक ‘सुपरनेचुरल पावर’ यानी भूतिया साये का शिकार हो गई थीं. एक मासूम सी गलती और सड़क पर पड़े एक ‘अंडे’ ने उनके घर में ऐसी दहशत फैलाई कि उन्हें ठीक करने के लिए तांत्रिक तक की मदद लेनी पड़ी. (फोटो साभारः फिल्म पोस्टर)

सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में एक्ट्रेस वैष्णवी मैकडोनाल्ड ने बताया, ‘जब मैंने वीराना किया था. उसके बाद सच में मैंने सुपरनेचुरल पावर महसूस किया था. हॉरर हुआ मेरे साथ. मुझ पर भूत का साया पड़ गया था और ये फिल्म वीराना के बाद हुआ जब मैं अपने घर हैदराबाद चली गई थी. मैं 9 साल की थी, चौथे क्लास में पढ़ती थी. शनिवार का दिन था, मैं स्कूल से आई उसी वक्त ये सब हुआ.’

उन्होंने आगे कहा, ‘किसी से सड़क पर कुछ करके रखा था. सड़क पर मुझे एक अंडा दिखा था, जिसे मैंने उठा लिया था और बाद में वो मुझसे टूट गया. उसमें हल्दी और कुमकुम लगा हुआ था. मैंने ये बात अपने घर में अपनी हेल्पर को बताया तो अन्नपूर्णा ने मुझसे कहा कि बेबी तुमने इसे क्यों उठाया… ये सब चीजें नहीं उठानी चाहिए. फिर उन्होंने मुझसे कहा कि इसे तोड़ना मत, लेकिन उसी वक्त मेरे हाथ वो स्लीप हो गया और वो टूट गया.’
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वैष्णवी ने बताया, ‘जिस दिन मेरे हाथ से अंडा टूटा, उसी रात से मैं नींद में चलने लगी, लेकिन मुझे याद है कि मैं होश में रहती थी. मेरी नींद टूटती नहीं थी, लेकिन मुझे याद है कि जब में घर में चलती थी कि तो मुझे पता रहता था कि मैं चल रही हूं. मेरा घर एक बंगला जैसा था, और मैं कॉरिडोर में चलते हुए कहती थी मेरे कपड़ तैयार करो… और ऐसा मेरे साथ लगभग एक महीने तक हुआ. आखिरकार किसी को मेरे घर पर बुलाया गया, जो मेरे अंदर से किसी को निकाला और सारी चीजें मेरी पहली फिल्म वीराना के बाद हुई.’

वैष्णवी के करियर की बात करें तो उन्होंने महज 9 साल की उम्र में रामसे ब्रदर्स की फिल्म ‘वीराना’ (1988) से बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने ‘लाडला’, ‘बम्बई का बाबू’ और ‘बरसात’ जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें घर-घर में असली पहचान मिली भारत के पहले सुपरहीरो शो ‘शक्तिमान’ से.

शो ‘शक्तिमान’ में उन्होंने पत्रकार ‘गीता विश्वास’ का किरदार निभाया, जो आज भी लोगों के जहन में ताजा है. वैष्णवी की सादगी और उनकी गंभीर अदाकारी ने उन्हें टीवी इंडस्ट्री की सबसे भरोसेमंद अभिनेत्रियों में से एक बना दिया.

फिल्मी पर्दे के बाद वैष्णवी ने छोटे पर्दे पर अपनी दूसरी पारी शुरू की. उन्होंने ‘मिले जब हम तुम’, ‘टशन-ए-इश्क’, ‘सपने सुहाने लड़कपन के’ और ‘ये उन दिनों की बात है’ जैसे हिट शोज में मां और बड़ी बहन के दमदार किरदार निभाए. वैष्णवी की खूबी यह रही है कि उन्होंने खुद को कभी एक दायरे में नहीं बांधा. जहां उन्होंने गीता विश्वास बनकर साहस दिखाया, वहीं कई शोज में उन्होंने एक बेहद सख्त और पारंपरिक महिला का किरदार भी बखूबी निभाया.
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