बॉलीवुड के वो दिग्गज डायरेक्टर जिनका नाम आते ही जहन में उलझे हुए जज्बात, जबड़ा हिला देने वाली कॉमेडी और यादगार किरदार उभर आते हैं. ये डायरेक्टर बॉलीवुड के कॉमेडी किंग प्रियदर्शन है. आज 30 जनवरी को डायरेक्टर प्रियदर्शन अपना 69वां जन्मदिन मना रहे हैं. ये डायरेक्टर कभी क्रिकेटर बनने का सपना देखते थे, लेकिन एक चोट ने उनकी जिंदगी की गाड़ी को पलट दिया और वो फिल्ममेकिंग की राह पर निकल पड़े.
डायरेक्टर प्रियदर्शन ने कॉमेडी फिल्मों से अपनी खास पहचान बनाई. वो चार दशकों से ज्यादा लंबे करियर में कई यादगार फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं. मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के शानदार डायरेक्टर ने हिंदी फिल्मों में कदम रखा और मलयालम की तरह ही सफलता हासिल की.

प्रियदर्शन सोमन नायर का जन्म 30 जनवरी 1957 को केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ था. उनका बचपन किताबों और कहानियों के बीच बीता. लाइब्रेरियन पिता की वजह से साहित्य उनके जीवन का अहम हिस्सा बना. अंग्रेजी साहित्य में पढ़ाई ने उन्हें कहानी कहने की गहराई, किरदारों की बुनावट और भावनात्मक संतुलन सिखाया, जो आगे चलकर उनकी फिल्मों की पहचान बनी.

उन्होंने गवर्नमेंट मॉडल बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई की और फिर यूनिवर्सिटी कॉलेज, तिरुवनंतपुरम से अंग्रेजी लिटरेचर में डिग्री हासिल की. लिटरेचर में उनकी पढ़ाई ने उन्हें कहानी कहने की कला, किरदारों को समझने की क्षमता को बढ़ाया.
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प्रियदर्शन का फिल्मों में आना अचानक नहीं हुआ. शुरुआत में उन्होंने पत्रकार और पटकथा लेखक के तौर पर काम किया और कहानी कहने की कला सीखी. अभिनेता मोहनलाल के साथ उनकी गहरी दोस्ती उनके करियर में अहम साबित हुई.

प्रियदर्शन ने साल 1984 में फिल्म Poochakkoru Mookkuthi से एक्टिंग डेब्यू किया था. डायरेक्टर ने कॉमेडी में अपनी अलग पहचान बनाई. पहली फिल्म के बाद प्रियदर्शन मलयालम सिनेमा में तेजी से लोकप्रिय हो गए.

मोहनलाल के साथ प्रियदर्शन की साझेदारी ने कई हिट फिल्में दीं, जैसे 1986 में थलावट्टम, 1988 में चित्रम और 1991 में किलुक्कम. इन फिल्मों ने न सिर्फ उन्हें कॉमेडी के मास्टर के तौर पर स्थापित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि वह कॉमेडी के साथ भावनाओं को भी बखूबी जोड़ सकते हैं.

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में कॉमेडी से दर्शकों के बीच पहचान बनाने के बाद प्रियदर्शन ने मलयालम फिल्मों के रीमेक से बॉलीवुड में कदम रखा.बॉलीवुड में प्रियदर्शन ने अक्षय कुमार के साथ कई फिल्में की. दोनों की जोड़ी हिट की गारंटी मानी जाती है. अक्षय और प्रियदर्शन अब ‘भूत बंगला’ में नजर आने वाली हैं.

1990 के दशक की शुरुआत में प्रियदर्शन ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा. उनकी पहली हिंदी फिल्म मुस्कुराहट 1992 में आई, लेकिन 2000 में आई हेरा फेरी ने उन्हें खास पहचान दिलाई. अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल स्टारर यह फिल्म बॉलीवुड में कॉमेडी की परिभाषा बदलने वाली साबित हुई.

प्रियदर्शन ने गंभीर फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा दिखाई. 2008 में आई तमिल फिल्म कांचीवरम को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जिससे यह साबित हुआ कि वह गंभीर सामाजिक मुद्दों पर भी उतनी ही खूबी से फिल्म बना सकते हैं, जितनी कॉमेडी में. हाल ही में 2021 में आई मरक्कर: लायन ऑफ द अरेबियन सी ने भी उन्हें सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया और उनकी बहुमुखी प्रतिभा को फिर से साबित किया.

प्रियदर्शन का सिनेमा में योगदान सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें नेशनल लेवल पर भी खूब सराहा गया था. कांचीवरम (2008) और मरक्कर (2021) जैसी फिल्मों के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. डायरेक्टर को 1994 में थेनमाविन कोम्बथ के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. साल 2012 में प्रियदर्शन को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.
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