स्ट्रेस बस्टर
आजकल हम ‘फील-गुड’ फिल्में ढूंढते हैं, लेकिन गोविंदा की पूरी फिल्मोग्राफी ‘फील-गुड’ है. ‘कुली नंबर 1,’ ‘साजन चले ससुराल,’ या ‘दूल्हे राजा’ जैसी फिल्में आपका मूड बदलने की ताकत रखती हैं, चाहे आप उन्हें कहीं से भी देखना शुरू करें. उनकी कॉमेडी में कड़वाहट या बेइज्जती नहीं थी. इसके बजाय, वे सिचुएशनल कॉमेडी के किंग थे. कादर खान के साथ उनके कोलेबोरेशन ने बॉलीवुड को ऐसे डायलॉग दिए जो आज भी स्ट्रेस रिलीवर का काम करते हैं. आज के स्ट्रेसफुल समय में, जब लोग डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ रहे हैं, गोविंदा की फिल्में एक एस्केप की तरह हैं.
डांस में कोई टेक्निक नहीं
आजकल हम ऋतिक रोशन या टाइगर श्रॉफ के डांस से हैरान रह जाते हैं, लेकिन गोविंदा को देखकर हम नाचने लगते हैं. टेक्निक और फीलिंग में यही फर्क है. गोविंदा ने डांस को कभी टास्क नहीं माना. उनके स्टेप्स बहुत मुश्किल नहीं थे, लेकिन उनके चेहरे के एक्सप्रेशन बेमिसाल थे. चाहे वह ‘UP वाला ठुमका’ हो या ‘किसी डिस्को में जाए’… उनकी आंखें और मुस्कान उनके शरीर से ज्यादा नाचती थीं. इसीलिए आज भी, किसी शादी या पार्टी में, जब भी गोविंदा का गाना बजता है, लोग अपनी उम्र और इज्जत भूलकर नाचने लगते हैं. उनके डांस ने हमें सिखाया कि खुशी जाहिर करने के लिए परफेक्शन की जरूरत नहीं होती.
गोविंदा की कॉमिक टाइमिंग
गोविंदा की कॉमिक टाइमिंग के बारे में अक्सर कहा जाता है कि कोई उनका मुकाबला नहीं कर सकता. एक लाइन बोलने से पहले ही उनकी आंखों की चमक दर्शकों को हंसी के लिए तैयार कर देती थी. डेविड धवन के डायरेक्शन और गोविंदा की एक्टिंग ने मिलकर बॉलीवुड का ‘कॉमेडी का गोल्डन एरा’ बनाया. उन्होंने कभी ‘मेथड एक्टिंग’ करने का दावा नहीं किया, लेकिन उनकी परफॉर्मेंस इतनी आसान थी कि ऐसा बिल्कुल नहीं लगता था कि वे एक्टिंग कर रहे हैं.
आज के ‘रील स्टार’ हैं गोविंदा
हैरानी की बात है कि 2000 के बाद पैदा हुई पीढ़ी (Gen Z) भी गोविंदा की उतनी ही बड़ी फैन है. गोविंदा सोशल मीडिया पर एक कल्ट फिगर बन गए हैं. उनके डांस स्टेप्स और चेहरे के एक्सप्रेशन आज के रील्स और मीम्स का दिल हैं. जब भी कोई युवा कोई मजेदार सिचुएशन बताना चाहता है, तो वे गोविंदा का मीम इस्तेमाल करते हैं. इससे साबित होता है कि उनकी कला समय की सीमाओं को पार कर गई है.
गोविंदा जैसा कोई क्यों नहीं है?
गोविंदा ने साबित कर दिया कि सिर्फ सिक्स-पैक होने या हॉलीवुड जैसी फिल्में करने से स्टारडम नहीं मिलता. स्टारडम लोगों तक पहुंचने से मिलता है. उन्होंने अपनी कमियों को अपनी यूएसपी बना लिया. आज बॉलीवुड में टैलेंट की कमी नहीं है, लेकिन इसमें गोविंदा जैसी मास अपील और मासूम हंसी की कमी जरूर है.
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