Bollywood Most Cursed Movie : लोक कथाओं पर फिल्में बनाने का चलन बहुत पुराना है. हिंदी सिनेमा के इतिहास में शुरुआत में ज्यादातर फिल्में लोक कथाओं पर ही बनती थीं. 70 के दशक में आराधना (1969) के बाद सिनेमा ने अचानक बदलाव आया. रोमांस बेस्ड फिल्मों का दौर शुरू हुआ. फिर 1973 से एक्शन बेस्ड फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर जलवा बिखेरा. अमिताभ बच्चन एंग्रीमैन बनकर छा गए. 1975 में दीवार-शोले जैसी एक्शन-क्राइम फिल्म ने तो हिंदी सिनेमा में एक नए युग की शुरुआत की. ऐसे ही समय में छोटे बजट की एक ऐसी मूवी आई जिसने शोले जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म को टक्कर दी. यह मूवी श्रापित साबित हुई. एक्ट्रेस-प्रोड्यूसर-डिस्ट्रीब्यूटर्स की जिंदगी के लिए श्रापित साबित हुई.
1975 में अमिताभ बच्चन की दीवार और शोले फिल्म की गिनती कालजयी फिल्मों में होती है. दोनों ही फिल्मों ने हिंदी सिनेमा में एक युग की शुरुआत की. राजेश खन्ना का स्टारडम एक झटके में डूब गया. शोले फिल्म की गिनती बॉलीवुड की महान फिल्मों में होती है. शोले फिल्म से पहले छोटे बजट की एक फिल्म ‘जय संतोषी मां’ भी रिलीज हुई थी. इस फिल्म ने शोले जैसे बड़ी स्टार कास्ट वाली फिल्म के आगे अपना दमखम दिखाया. मजेदार बात यह है कि 2006 में इस फिल्म का रीमेक भी बनाया गया था लेकिन मूवी डिजास्टर साबित हुई.

‘जय संतोषी मां’ फिल्म शोले से पहले ही रिलीज हुई थी. इसका डायरेक्शन विजय शर्मा ने किया था. फिल्म की कहानी आर. प्रियदर्शिनी ने लिखी थी. फिल्म को सतराम रोहरा ने प्रोड्यूस किया था. फिल्म में कनन कौशल, भारत भूषण, आशीष कुमार, अनीता गुहा, त्रिलोक कपूर और कबीर खान नजर आए थे. म्यूजिक सी. अर्जुन का था. गीतकार कवि प्रदीप थे.

ऊषा मंगेशकर-महेंद्र कपूर ने फिल्म के गाने गाए थे. फिल्म के पॉप्युलर गानों में ‘करती हूं तुम्हारा व्रत स्वीकार करो मां’, ‘यहां वहां जहां तहां मत पूछो कहां कहां’ और ‘मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की’ आज भी नवरात्रि के समय पूजा-पंडाल में सुनने को मिल जाते हैं.
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फिल्म बहुत ही कम बजट में तैयार हुई थी. फिल्म को देखने के लिए लोग दूर-दराज क्षेत्रों से बैलगाड़ी में परिवार के साथ सिनेमाघरों में आते थे. थिएटर पर यह फिल्म किसी मंदिर के जैसे थी. लोग थिएटर के बाहर प्रसाद बांटते थे. कई तो थिएटर में अंदर जाने से पहले बाहर ही जूते-चप्पल उतार देते थे.

फिल्म से जुड़ा मजेदार किस्सा यह भी है कि शुरू के तीन दिन फिल्म का बुरा हाल लेकिन सोमवार से सिनेमाघरों में भीड़ बढ़ने लगी. गांवों से भीड़ शहरों में आने लगी. फिल्म की सफलता को देखते हुए और प्रिंट तैयार किए गए. ऐसे में मूवी का बजट 45 लाख के करीब हो गया. फिल्म मे 4.5 करोड़ के आसपास की कमाई की. फिल्म को ब्लॉकबस्टर कैटेगरी में शामिल किया गया. आरती के दौरान दर्शक स्क्रीन पर पैसे फेंकते थे. संतोषी माता का व्रत इस फिल्म के बाद ही शुरू हुआ.

फिल्म में अनीता गुहा ने संतोषी मां का किरदार निभाया था. फिल्म की सफलता के बाद लोग उनके घर आशीर्वाद लेने के लिए जाया करते थे. लोग सड़क पर उनके पैर छूते थे. हालांकि अनीता गुहा की निजी जिंदगी बहुत दुखों से गुजरी. कभी मां नहीं बन सकीं. उनके पति का जल्द निधन हो गया. कई बीमारियों ने उन्हें घेर लिया था. वो अक्सर मेकअप में रहती थीं. 2007 में उनका निधन हो गया.

फिल्म के डायरेक्टर ने कहने पर यह फिल्म बनाई थी. 23 साल तक उनकी पत्नी को कोई औलाद नहीं हुई थी. फिर संतोषी मां के व्रत रखने पर उन्हें संतान प्राप्त हुई. कहा जाता है कि फिल्म के प्रोड्यूसर सतराम रोहरा की लाइफ पर कोई खास असर नहीं पड़ा. फिल्म का पूरा प्रॉफिट डिस्ट्रीब्यूटर केदारनाथ अग्रवाल को मिला. यह एक एग्रीमेंट की वजह से हुआ. उन्होंने खुद को दीवालिया घोषित कर दिया था. केदारनाथ अग्रवाल के साथ के साथ भी कुछ अच्छा नहीं हुआ. उनकी कमाई उनके ही सगे भाइयों ने हड़प ली.

‘जय संतोषी मां’ फिल्म के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह फिल्म शोले के साथ रिलीज हुई थी. सच्चाई यह है कि यह फिल्म शोले से पहले रिलीज हुई थी. 45 लाख के बजट में बनी जय संतोषी मां फिल्म ने 4.5 करोड़ के आसपास की कमाई की. यह एक ऑल टाइम मूवी साबित हुई. दूसरी ओर शोले 2.7 करोड़ के बजट में बनकर तैयार हुई थी. मूवी ने 20 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया. ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. फिल्म दो साल तक देशभर के अलग-अलग सिनेमाघरों में चलती रही. शोले फिल्म हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्म में शुमार है.

‘जय संतोषी मां’ फिल्म का रीमेक भी इसी नाम से बनाया गया. डायरेक्टर अहमद सिद्दीकी थे. म्यूजिक अनु मलिक, गीतकार स्वानंद किरकिरे थे. कहानी सुष्मा अहूजा ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले-डायलॉग सुलेखा बाजपेयी ने लिखे थे. फिल्म 29 सितंबर 2006 को रिलीज हुई थी. राकेश बापट, नुसरत भरुचा, साक्षी कौशिक और पूर्वा पराग लीड रोल में थे. 4.31 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म सिर्फ 31 लाख रुपये ही कमा पाई थी. यह एक डिजास्टर फिल्म साबित हुई थी.
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