’द केरल स्टोरी’ ने भारतीय सिनेमा में एक नया इतिहास रचा और ‘शालिनी उन्नीकृष्णन’ का आपका किरदार घर-घर में मशहूर हुआ. अब जब फिल्म के दूसरे भाग की चर्चा है, तो फैंस आपको इसमें न पाकर थोड़े निराश हैं. क्या यह आपका अपना फैसला था या कहानी की मांग कुछ ऐसी थी कि इसमें आपकी जरूरत नहीं रही?
मैं हमेशा कहती हूं कि मेरे फैंस बहुत बाईस हैं मेरी तरफ. मुझसे बहुत प्यार करते हैं. जैसा आपने कहा शालिनी का किरदार घर घर में मशहूर हुआ, इसलिए वो किरदार के साथ छेड़खानी नहीं करनी चाहिए. ‘द केरल स्टोरी’ आईएसआईएस के बारे में था और यह दिखाता है कि कैसे यह लड़की शालिनी एक आतंकवादी बन जाती है और वह जेल से अपनी पूरी कहानी सुनाती है. मेरा मानना है कि असल जिंदगी में अगर कोई आतंकवादी है तो उसे जेल में ही होना चाहिए. शालिनी का सिर्फ सीक्वल में होने के लिए जेल से बाहर आ जाना मुझे सही नहीं लगता, लेकिन ‘कमांडो’ या ‘सनफ्लॉवर 2’ जैसे सीक्वल्स में अगर आपको लगे कि मैं मर गई हूं, तब भी मैं वापस जिंदा आ सकती हूं. 1920 या रीता सान्याल जैसे किसी भी काल्पनिक किरदार में ऐसा संभव है. ऐसा मेरा मानना है. अगर मुझे सीक्वल में कोई भूमिका ऑफर की गई है या नहीं, इस पर होने वाली चर्चाएं मेरे हिसाब से निर्माता और अभिनेता के बीच ही रहनी चाहिए, उन्हें सार्वजनिक रूप से चर्चा का विषय नहीं बनाना चाहिए. पहला भाग अफगानिस्तान में आईएसआईएस कैंपों की कहानी पर आधारित था और इसमें चरणबद्ध तरीके से दिखाया गया था कि कैसे एक मासूम लड़की आतंकवादी बन जाती है. भाग 2 एक अलग कहानी है.
अक्सर एक्टर्स किसी गहरे किरदार से बाहर निकलने के बाद एक ‘क्लोजर’ (अंत) चाहते हैं. क्या आपको लगता है कि शालिनी की कहानी पहले भाग में पूरी हो चुकी थी और अब उस विरासत को किसी और को सौंपने का सही समय है?
मेरे हिसाब से शालिनी की कहानी ही अधूरी है. एंड कभी कंप्लीट नहीं हो सकती. पार्ट 2 अलग कहानी है.
इस फिल्म के साथ सफलता तो बहुत मिली, लेकिन विवादों ने भी आपका पीछा नहीं छोड़ा. क्या ‘पार्ट 2’ का हिस्सा न होने के पीछे एक वजह यह भी है कि आप अब कुछ समय के लिए विवादों से दूर रहकर किसी अलग तरह के सिनेमा (जैसे कॉमेडी या एक्शन) पर ध्यान देना चाहती हैं?
जब भी मैं कोई फिल्म करती हूं, उसके रिलीज होने के बाद लोग मुझसे पूछते हैं- क्या अब आप सिर्फ यही जॉनर करेंगी? जब मैंने 1920 की थी, तब सबने कहा अब आप सिर्फ हॉरर फिल्में ही करेंगी? जब मैंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘बस्तर’ की, तब लोगों ने कहा अब आप सिर्फ रियलिस्टिक फिल्में ही करेंगी. फिर मैंने ‘रीता सान्याल’ और ‘सनफ्लावर 2′ की, जो रियलिटी से बिल्कुल अलग थीं. जब मैंने कमांडो की, तब सबने कहा कि अब आपको सिर्फ एक्शन फिल्में ही करनी चाहिए. मैं इसे एक कॉम्प्लिमेंट की तरह लेती हूं और कोशिश करती हूं कि जो भी किरदार करूं, उसे जितना हो सके उतना वास्तविक और ईमानदारी से निभाऊं.
’द केरल स्टोरी’ के बाद दर्शकों की उम्मीदें आपसे काफी बढ़ गई हैं. अब जब आप इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा नहीं हैं, तो आने वाले समय में हमें अदा शर्मा किस तरह के किरदारों में दिखने वाली हैं? क्या हम फिर से किसी रीयल-लाइफ इंस्पायर्ड स्टोरी की उम्मीद कर सकते हैं?
मैं सभी जॉनर करना चाहती हूं. मैं एक बायोपिक कर रही हूं जो शायद कंट्रोवर्शियल हो सकती है और एक और फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है. साथ ही मैं एक हॉरर फिल्म भी कर रही हूं. अगर मैं किसी फिल्म का हिस्सा हूं और उस पर कोई विवाद होता है, तो मैं आग से गुजरने के लिए भी तैयार हूं. मुझे उससे डर नहीं लगता, लेकिन जब मैं किसी फिल्म का हिस्सा ही नहीं हूं, तो सिर्फ खबरों में रहने के लिए किसी विवाद पर बोलना मुझे पसंद नहीं है.
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