70 और 80 के दशक का वो एक्टर जिसके लिए किशोर कुमार ने अपने उसूलों को ताक पर रख दिया था. एक्टर फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनके एक भाई ने अभिनय की दुनिया में सुपरस्टारडम का स्वाद चखा, तो दूसरा संगीत जगत का महारथी था. ऐसे में वो अपने भाइयों से अलग अपनी पहचान बनाने में जुट गए थे जिसमें उन्हें कुछ हद तक सफलता भी मिली थी.
70 का ये सितारा जिसकी आज बात कर रहे हैं वो किशोर कुमार और अशोक कुमार के छोटे भाई अनूप कुमार थे. अनूप कुमार एक्टिंग औ सिंगिंग दोनों में ही सक्रिय थे. उन्होंने भाई अशोक कुमार की तरह अभिनय भी किया औऱ किशोर कुमार की तरह वो संगीत प्रेमी भी थे. यहां तक उन्होंने किशोर कुमार को संगीत की ट्रेनिंग भी दी थी. भारतीय सिनेमा के दो दिग्गजों से गहराई से जुड़े होने के बावजूद, उनका योगदान अक्सर कम आंका गया, लेकिन कभी भुलाया नहीं जा सका.

9 जनवरी 1926 को जन्मे अनूप कुमार, अशोक कुमार और किशोर कुमार के सगे भाई थे. जहां उनके भाइयों को बड़ी शोहरत मिली, वहीं अनूप ने अपनी ईमानदारी, बहुमुखी प्रतिभा और संगीत की चमक से खुद के लिए एक अलग पहचान बनाई.

मध्य प्रदेश में एक हिंदू बंगाली परिवार में जन्मे अनूप कुमार के पिता कुंजलाल गांगुली वकील थे और मां गौरी देवी गृहिणी थीं. उन्होंने इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई की, जहां उन्होंने संगीत में विशारद की डिग्री हासिल की. उन्होंने अपने भाइयों से अलग क्लासिकल म्यूजिक की ट्रेनिंग हासिल की थी. उन्होंने ही किशोर कुमार को योडलिंग की कला सिखाई, जो बाद में दिग्गज सिंगर की गायकी की खास पहचान बन गई.
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अनूप कुमार 1940 के दशक के अंत में मुंबई आ गए और अपने बड़े भाई अशोक कुमार के नक्शे कदम पर चलते उन्होंने फिल्मी पर्दे पर किस्मत आजमाई. उन्होंने 1950 में फिल्म ‘खिलाड़ी’ में सपोर्टिंग रोल से एक्टिंग डेब्यू किया था. इसके बाद उसी साल ‘गौना’ में उषा किरण और पूर्णिमा के साथ पहली बार लीड रोल अदा किया था. हालांकि सफलता धीरे-धीरे मिली, लेकिन अनूप अपने काम पर केंद्रित रहे.

एक्टर को असल पहचान अमिया चक्रवर्ती की रोमांटिक कॉमेडी ‘देख कबीरा रोया’ (1957) से मिली. इसमें गायक मोहन की भूमिका निभाते हुए अनूप ने शानदार कॉमेडी के साथ सूझ-बूझ का प्रदर्शन किया था. इस फिल्म ने उन्हें हल्के-फुल्के और किरदार प्रधान रोल्स के लिए एक भरोसेमंद कलाकार के रूप में स्थापित किया.

अनूप कुमार का सबसे यादगार अभिनय ‘चलती का नाम गाड़ी’ (1958) में देखने को मिला, जिसमें उन्होंने अपने भाइयों अशोक कुमार और किशोर कुमार के साथ स्क्रीन शेयर किया था. मासूम, चुलबुले और मजेदार जगमोहन ‘जग्गू’ शर्मा के किरदार ने हर पीढ़ी के दिल जीत लिया था.

करीब चार दशकों के करियर में उन्होंने लगभग 75 फिल्मों में काम किया. चाहे लीड रोल हो या सपोर्टिंग, हर किरदार में उन्होंने गर्मजोशी और सच्चाई भरी. उन्होंने ‘लुकोचुरी’ (1958), ‘चाचा जिंदाबाद’ (1959), ‘नाच घर’ (1959), ‘बेजुबान’ (1961), ‘महाभारत’ (1965), ‘तुम्हारे बिना’ (1982), ‘ओवर मैरिज’ (1984), ‘जवाब हम देंगे’ (1987), ‘दुश्मन ज़माना’ (1992), ‘जब याद किसी की आती है’ (1967), ‘दिल और मोहब्बत’ (1968), ‘आंसू बन गए फूल’ (1969) (जिसका उन्होंने निर्माण भी किया), ‘प्रेम पुजारी’ (1970) और ‘अमर प्रेम’ (1972) जैसी कई फिल्मों में काम किया था.

अनूप कुमार ने ‘झुमरू’ (1961), ‘जंगली’ (1961), ‘कश्मीर की कली’ (1964), ‘रात और दिन’ (1967), और ‘विक्टोरिया नंबर 203’ (1972) जैसी क्लासिक फिल्मों में भी अभिनय किया. उनकी आखिरी फिल्म 1995 में ‘रॉक डांसर’ थी. आखिरी के वर्षों में एक्टर ने फिल्म छोड़ टीवी का रुख कर लिया था. वो दूरदर्शन के डिटेक्टिव सीरियल ‘भीम भवानी’ (1990) में अशोक कुमार के साथ अपने शानदार अभिनय से छाप छोड़ने में सफल रहे थे. वे ‘दादा दादी की कहानी’ और ‘एक राजा एक रानी’ जैसे शोज में भी नजर आए.

अनूप कुमार ने ‘ये मोहब्बत क्या करेंगे’ (चलती का नाम जिंदगी, 1982), ‘अल्लाह खैर बाबा खैर’ (हम दो डाकू, 1967), और ‘लिया लिया रे’ (रॉक डांसर, 1995) जैसे गानों में अपनी आवाज दी थी. अनूप कुमार के लिए उनके भाई किशोर कुमार ने अपने उसूलों को ताक पर रखकर उनके लिए दो फिल्मों में गाना गाया था, जबकि किशोर दा अपने रिश्तेदारों के लिए कभी नहीं गाते थे.
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