होली का त्योहार आते ही रंगों के साथ एक खास धुन भी हवा में घुल जाती है. समय बदल गया, गाने बदल गए, डीजे और रील्स का दौर आ गया, लेकिन ‘रंग बरसे’ की खुमारी आज भी वैसी ही है. चार दशक बाद भी यह गाना हर होली की पहली पसंद बना हुआ है और बिना इसके रंगों का जश्न अधूरा सा लगता है. इस गाने के बाद संजीव कुमार का शक यकीन में बदल जाता है.
छा गए थे अमिताभ
फिल्म में अमित (अमिताभ बच्चन) एक कवि है जो अपनी प्रेमिका चांदनी (रेखा) से अलग होकर, अपने भाई की मंगेतर शोभा (जया बच्चन) से शादी कर लेता है. लेकिन इसके बाद में, अमित और चांदनी दोबारा मिल जाते हैं. दोनों चुपके से संबंध रखते हैं, आखिर मेंअपनी पत्नी के प्रति जिम्मेदारी और सामाजिक समझ के चलते अमित चांदनी को छोड़कर अपनी पत्नी शोभा के पास लौट ही आता है.
गाने बिना अधूरा हो होली का जश्न
यूं तो होली पर कई गाने बने हैं. लेकिन जो दिल में बसा है, वो है असली होली वाली फील वाला गाना ‘रंग बरसे’. चार दशक से ज्यादा हो गए, लेकिन ये गाना आज भी हर होली पार्टी, हर सोसायटी फंक्शन और हर फैमिली सेलिब्रेशन की जान बना हुआ है. ‘रंग बरसे’ सिर्फ एक मस्ती भरा गाना नहीं है. इसमें रंगों के साथ-साथ रिश्तों की शरारत, छुपे जज्बात और भांग वाली खुली हंसी भी है. गाने में चुटीलापन है, प्यार है और देसी होली का असली रंग है. यही वजह है कि ये सिर्फ डांस नंबर नहीं, बल्कि एक कहानी जैसा लगता है.
अमिताभ बच्चन के बहक गए थे कदम
इस गाने से अमिताभ नशे में इतने बहक जाते हैं कि वह भूल जाते हैं कि वह किसी और के पति हैं. रेखा संग उनकी केमिस्ट्री देख संजीव कुमार भी हैरान थे, वहीं जया बच्चन ये सारा नजारा खड़ी-खड़ी देखती रहती हैं. इस गाने के बाद जया पूछती भी है कि आज आप बहुत खुश थे. अमिताभ शायराना अंदाज में अपने दिल की बात जया से कह देते हैं.
संजीव कुमार यकीन में बदल जाता है शक
इस गाने के बाद संजीव कुमार जब रेखा से अमित को लेकर बात करते हैं, तो वह कहती हैं कि आज वह बहुत खुश थे, ये सुनकर संजीव कुमार कहते हैं उनका शक यकीन में बदल रहा है. फिल्म का गाना आज भी लोगो का फेवरेट बना हुआ है. जब हर त्योहार पर नया गाना लॉन्च करने की होड़ लगी है, तब भी होली का असली पहचान ‘रंग बरसे’ ही बना हुआ है. ये अब सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि एक परंपरा जैसा बन चुका है.होली 2026 में भी जब रंग उड़ेंगे, लोग हंसेंगे, डांस करेंगे और स्पीकर बजेगा, तो बहुत मुमकिन है कि शुरुआत फिर उसी लाइन से हो, रंग बरसे भीगे चुनर वाली.
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न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें
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