Bollywood Blockbuster Movies : फिल्म को सफल बनाने के लिए डायरेक्टर-प्रोड्यूसर कई तरह की रणनीति स्ट्रेटजी अपनाते हैं. फिल्म की स्क्रिप्ट फाइनल करने से लेकर बेहतरीन डायलॉग, खूबसूरत लोकेशन पर फिल्मांकन जैसी चीजें शामिल करते हैं. हर सीन पर मेहनत करते हैं. बॉलीवुड का एक हीरो 80 के दशक से ही अपनी फिल्मों में खास तरह की रणनीति अपनाता रहा है. हर बार यह रणनीति कामयाब रही. 26 साल के अंतराल में इस हीरो ने चार फिल्मों में काम किया. दिलचस्प बात यह है कि दो फिल्में ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर, एक ब्लॉकबस्टर तो एक फिल्म कल्ट हिट बन गई. आइये जानते हैं इन चारों फिल्मों से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स..
80 का दशक खत्म होने वाला था. बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक नासिर हुसैन ने अपने बेटे को एक फिल्म डायरेक्ट करने का ऑफर दिया. उनकी पिछली तीन फिल्में फ्लॉप हो चुकी थी. यह फिल्म आमिर खान के साथ बनाई गई. नाम था : कयामत से कयामत तक जो कि 1988 में रिलीज हुई थी. आमिर खान नासिर हुसैन के भांजे थे. मंसूर खान उनके मामा के लड़के हैं. पूरा परिवार फिल्म को बेहतर बनाने में जुट गया. मंसूर खान की बहन नुजहत खान और आमिर खान फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर थे. आमिर खान और जूही चावाला की यह डेब्यू फिल्म थी. म्यूजिक आनंद-मिलिंद का था. प्रोड्यूसर नासिर हुसैन थे. इस फिल्म के प्रमोशन के लिए ऐसी रणनीति अपनाई गई, जिसकी कल्पना कोई नहीं कर सकता था. आमिर खान ने यहीं से ऐसी स्ट्रेटजी अपनी चार फिल्मों में अपनाई. हर फिल्म कामयाब रही. ये फिल्में थीं : कयामत से कयामत तक, रंगीला, थ्री इडियट्स और पीके. दो फिल्में ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर रहीं. एक ब्लॉकबस्टर और एक मैसिव हिट रही.

करीब 37 साल पहले कयामत से कयामत तक रिलीज हुए थी जिसके गाने ऑल टाइम फेवरेट निकले. जमाने को दिखाना है (1981), मंजिल मंजिल (1984) और जबर्दस्त (1985) फिल्मों के फ्लॉप हो जाने के बाद प्रोड्यूसर नासिर हुसैन ने लव स्टोरी पर फिल्म लिखी. अपने भांजे आमिर खान और जूही चावला को लॉन्च किया. इस फिल्म ने उदित नारायण, संगीतकार आनंद-मिलिंद, आमिर खान, जूही चावला की तकदीर बदल दी. फिल्म को आमिर खान के ममेरे भाई मंसूर खान ने डायरेक्टर किया था. गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी थे. इस फिल्म के म्यूजिक के 80 लाख ऑडियो कैसेट बिके थे.

फिल्म में सभी गाने सुपरहिट थे. पॉप्युलर गानों में ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा’, ‘ऐ मेरे हमसफर, एक जरा इंतजार’, ‘अकेले हैं तो क्या गम है’, ‘गजब का है दिन’ शामिल हैं. सबसे मेलोडियस सॉन्ग ‘ऐ मेरे हमसफर’ को गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था. उदित नारायण और अलका याज्ञनिक ने रोमांटिक अंदाज में गाया था. ‘कयामत से कयामत तक’ फिल्म का टाइटल पहले ‘नफरत के वारिस’ था. फिल्म की कहानी नासिर हुसैन ने जरूर लिखी थी लेकिन उनके बेटे मंसूर ने इस फिल्म को अपनी शर्तों पर डायरेक्ट किया था. उन्होंने यह भी कहा था कि आरडी बर्मन इस फिल्म में म्यूजिक नहीं देंगे. फिल्म कंप्लीट होने के बाद पूरे एक साल तक इस मूवी को कोई डिस्ट्रीब्यूटर खरीद ही नहीं रहा था. फिल्म में हीरो-हीरोइन भी नए थे. मंसूर खान परेशान हो गए.
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नासिर हुसैन ने अपने जोखिम पर फिल्म रिलीज की. इस फिल्म के प्रमोशन के लिए नासिर हुसैन ने अनोखी स्ट्रेटजी अपनाई थी. आमिर खान बढ़ी हुई दाढ़ी, मैले-कुचैले कपड़े पहनकर डिस्ट्रीब्यूटर्स से मिला करते थे. नासिर हुसैन जब प्रोड्यूसर को बताते कि यही हीरो तो हर कोई हैरान रह जाता था. बाद में वो असलियत बताते थे. इसके अलावा आमिर खान-जूही चावला अपनी फिल्म के पोस्टर ऑटो के पीछे चिकपाते थे. 2.5 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 5 करोड़ का कलेक्शन किया था. उस 1988 की तीसरी सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म थी.

आमिर खान ने 1995 में एक बार फिर से इसी रणनीति पर काम किया. 8 सितंबर 1995 को रिलीज हुई फिल्म रंगीला में जिसका डायरेक्शन रामगोपाल वर्मा ने किया था. रामगोपाल वर्मा फिल्म के प्रोड्यूसर भी थे. रंगीला फिल्म में आमिर खान, उर्मिला मांतोडकर और जैकी श्रॉफ लीड रोल में थे. डायलॉग नीरज वोरा और संजय छैल ने लिखे थे. म्यूजिक एआर रहमान का था. यह एआर रहमान और रामगोपाल वर्मा की पहली हिंदी फिल्म थी. रंगीला फिल्म के एडिटर ईश्वर निवास ने थे जिन्होंने ‘शूल’ फिल्म का डायरेक्शन किया था. गीतकार महबूब थे.

रंगीला एक म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी. इस फिल्म में एक्टर-एक्ट्रेस के ड्रेस, गाने और उनके डायलॉग बहुत अलग थे. एआर रहमान का म्यूजिक एवरग्रीन और मेलोडियस था. यह फिल्म उस समय बॉलीवुड में बन रही रोमांटिक-एक्शन फिल्मों से बिल्कुल अलग थी. आमिर खान ने फिल्म में टपोरी लैंग्वेज को सीखने के लिए मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले टपोरियों के साथ बहुत ज्यादा वक्त गुजारा था. आमिर खान ने कई हफ्ते तक नहाया नहीं था ताकि लुक कैरेक्टर के हिसाब से हो. मजेदार बात यह है कि इस फिल्म के लिए आमिर खान ने राह चलते लोगों से उनके कपड़े लिए. नए कपड़े गिफ्ट में दिए. बजट करीब 4.5 करोड़्र रुपये का था. मूवी ने 33 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

2009 में आमिर खान की एक ऐसी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर आई जिसने भारत के अंदर 200 करोड़ का कारोबार किया था. ऐसा कारनामा करने वाली यह पहली फिल्म थी. नाम था : 3 इडियट्स. फिल्म की कहानी इंजीनियरिंग कॉलेज पर बेस्ड थी. आमिर खान, आर. माधवन, शरमन जोशी, करीना कपूर, बोमन ईरानी और ओमन वैद्य लीड रोल में थे. डायरेक्शन राजकुमार हिरानी का था. प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा थे. अमिजात जोशी, राजकुमार हिरानी और विधु विनोद चोपड़ा ने मिलकर स्क्रिप्ट लिखी थी. म्यूजिक शांतनु मोइत्रा ने कंपोज किया था. 77 करोड़ रुपये का रखा गया था. इस फिल्म का टाइटल भी आमिर खान ने ही सुझाया था. दरअसल ‘इडियट्स’ टाइटल दीपक शिवदसानी के पास रजिस्टर्ड था. उन्होंने ‘टाइटल’ छोड़ने से इनकार कर दिया था. ऐसे में आमिर खान ने मूवी का टाइटल ‘3 इडियट्स’ रखने का सुझाव दिया. यह नाम पूरे देश में पॉप्युलर हो गया.

3 इडियट्स फिल्म के प्रमोशन के लिए आमिर खान ने ‘कयामत से कयामत तक’ जैसी स्ट्रेटजी अपनाई. उन्होंने ऑटो रिक्शा पर पोस्टर चिपकाए थे. इन पोस्टर्स में थ्री इडियट्स लिखा. वो देश के अलग-अलग शहरों में अलग-अलग गेटअप में घूमे. उन्हें नए गेटअप में कोई पहचान ही नहीं पाया. गांव के स्कूलों में बच्चों के बीच चाय लेकर पहुंच गए थे. इन सबकी खबरें राष्ट्रीय मीडिया में अखबरों में पब्लिश हुईं. फिल्म को बहुत ज्यादा पब्लिसिटी मिली. आमिर खान का नाम सुर्खियों में आया. सबको पता चल गया कि उनकी फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ आ रही है. 77 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस मूवी ने 350 करोड़ का वर्ल्ड वाइड कलेक्शन किया था. यह हिंदी सिनेमा की एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म मानी जाती है. थ्री इडियट्स 2009 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

2014 में आमिर खान ने एक बार फिर से इसी स्ट्रेटजी को अपनाया. इस बार उनकी फिल्म ‘पीके’ रिलीज हुई थी. राजकुमार हिरानी डायरेक्टर थे. विधु विनोद चोपड़ा के साथ फिल्म को प्रोड्यूस किया था. फिल्म का विषय बहुत ही विवादास्पद था. पूरे देश में इस फिल्म को लेकर जबर्दस्त विरोध भी देखने को मिला था. कई संगठनों ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए इसे बैन करने की मांग की थी. आमिर खान ने ‘पीके’फिल्म के लिए टीवी स्टार शांति भूषण से दो साल तक भोजपुरी सीखी. पीके के किरदार में वह भोजपुरी बोलते हुए पान चबाते हुए दिखते हैं. ‘पीके’ के प्रमोशन के लिए भी आमिर खान वाराणसी पहुंचे थे. बनारसी पान का स्वाद चखा. उन्होंने बताया था कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान वो रोजाना 100 पान खाते थे. आमिर खान ट्वीट भी भोजपुरी में करने लगे थे. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर उस समय के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. 122 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड 770 करोड़ का कलेक्शन किया था. पीके फिल्म 2014 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी मूवी थी.
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