यह समारोह सिनेमा के सबसे बड़े उत्सव के रूप में देखा जाता है. ऑस्कर में बेस्ट फिल्म, सबसे बेहतरीन कलाकारों के साथ ही टेक्नीकल डिपार्टमेंट भी अवॉर्ड्स दिए जाते हैं. दुनियाभर के फिल्म प्रेमियों की नजरें इस भव्य इवेंट पर टिकी रहती हैं और हॉलीवुड से लेकर अंतरराष्ट्रीय सिनेमा तक के सितारे इस मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं. तो चलिए आपको ऑस्कर अवॉर्ड्स से पहले इसके बारे में अनजाने-अनसुने फैक्ट्स बताते हैं.
भारतीय दर्शकों के लिए भी इस समारोह को देखने का मौका उपलब्ध रहेगा. अमेरिका में यह आज 15 मार्च की रात को डॉल्बी थिएटर्स में आयोजित होगा, लेकिन भारत में ऑडियंस इसे कल यानी कि 16 मार्च की सुबह देख सकती है. ऑस्कर अवॉर्ड्स 15 मार्च की शाम 7 बजे ईस्टर्न टाइम (ईटी) से शुरू होगा, जबकि भारत में इसे 16 मार्च की सुबह 4 बजकर 30 मिनट से लाइव देखा जा सकेगा.16 मार्च को जियोहॉटस्टार के ऐप और वेबसाइट पर सुबह 4 बजकर 30 मिनट से इसका लाइव स्ट्रीम उपलब्ध रहेगा. वहीं स्टार मूवीज चैनल पर भी इसी समय इसका लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा. हर साल की तरह इस बार भी समारोह की शुरुआत रेड कार्पेट से होगी, जहां दुनिया भर के बड़े सितारे अपने खास अंदाज और फैशन के साथ नजर आएंगे. इसके बाद मुख्य अवॉर्ड समारोह शुरू होगा.
क्या है ऑस्कर का असली नाम?
अगर कोई दर्शक सुबह इसे नहीं देख पाता, तो जियोहॉटस्टार पर बाद में पूरा कार्यक्रम उपलब्ध रहेगा, जबकि स्टार मूवीज चैनल पर उसी दिन रात 9 बजे इसका रिपीट टेलीकास्ट दिखाया जाएगा. ऑस्कर अवॉर्ड्स से जुड़े कई ऐसे दिलचस्प फैक्ट्स भी हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. सबसे पहले बात करते हैं ऑस्कर अवॉर्ड्स के नाम की. इस अवॉर्ड का ऑफिशियल नाम ‘एकेडमी अवॉर्ड ऑफ मेरिट’ है. समय के साथ ‘ऑस्कर’ नाम इतना लोकप्रिय हो गया कि आज पूरी दुनिया इस प्रतिष्ठित सम्मान को इसी नाम से पहचानती है.
एकेडमी अवॉर्ड्स कैसे बना ‘ऑस्कर’?
इस नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. 1930 के दशक में एकेडमी की लाइब्रेरियन मार्गरेट हेरिक ने पहली बार इस ट्रॉफी को देखकर मजाक में कहा था कि यह उन्हें उनके चाचा ऑस्कर की याद दिलाती है. यह टिप्पणी धीरे-धीरे मशहूर हो गई और 1934 में अखबारों में ‘ऑस्कर’ शब्द का इस्तेमाल शुरू हो गया. बाद में 1939 में एकेडमी ने इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया.
विनर्स बेच सकते हैं अपनी ट्रॉफी?
ऑस्कर ट्रॉफी से जुड़ा एक सख्त नियम भी है. 1951 के बाद से विजेता अपनी ट्रॉफी को सीधे बेच नहीं सकते. अगर कोई विजेता या उनके परिवार वाले कभी इसे बेचना चाहें, तो उन्हें पहले इसे 1 डॉलर में एकेडमी को वापस ऑफर करना होता है. यह नियम इसलिए बनाया गया ताकि इस सम्मान की गरिमा बनी रहे और यह सिर्फ एक पुरस्कार ही रहे, कोई व्यापारिक वस्तु न बन जाए. इससे पहले के पुराने ऑस्कर बेचे जा सकते हैं, लेकिन 1951 के बाद वाले नहीं.
क्या असली सोने की होती है ऑस्कर की ट्रॉफी?
ट्रॉफी की बनावट भी उतनी ही खास है. ऑस्कर की प्रतिमा करीब 13.5 इंच यानी लगभग 34 सेंटीमीटर ऊंची होती है और इसका वजन लगभग 8.5 पाउंड यानी करीब 3.85 किलो होता है. यह ठोस ब्रॉन्ज (कांसे) से बनाई जाती है और इसके ऊपर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई जाती है. यही वजह है कि हाथ में पकड़ने पर यह ट्रॉफी काफी भारी और बेहद खास महसूस होती है.
Discover more from Bollywood News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.